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श्रीराम कथा: ‘प्रदर्शन’ नहीं, ‘आत्मदर्शन’ से ही होगा सच्चा नारी-सशक्तिकरण: डॉ. सर्वेश्वर

हापुड़।

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की असीम अनुकंपा से अर्जुन नगर के सामने वाला ग्राउंड, स्वर्ग आश्रम रोड, हापुड़ में आयोजित सात-दिवसीय श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ में कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर जी ने अहल्या उद्धार गाथा का सुमधुर भजनों व चौपाइयों के साथ व्याख्यान किया।

उन्होंने बताया कि प्रभु श्री राम जी अपनी दिव्य बाल-लीलाओं को करते हुए गुरुकुल से अपनी शिक्षा पूर्ण कर अयोध्या लौटते हैं। तत्पश्चात् राक्षसमर्दन हेतु महामुनि विश्वामित्र जी महाराजा दशरथ के पास प्रभु श्री राम व लक्ष्मण की माँग करने आते हैं और श्री राम अपने अवतारकार्य की पृष्ठभूमि तैयार करते हुए विश्वामित्र जी संग उनके आश्रम की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। वन में ताड़का व सुबाहु का वध कर यज्ञरक्षण करते हुए प्रभु जनकपुरी की ओर गमन करते हैं। मार्ग में आगे बढ़ते हुए प्रभु शापवश शिला बनी गौतमपत्नी अहल्या की बरसों की प्रतीक्षा को समाप्त कर उसे अपने दर्शनों से कृतार्थ करते हैं और अपनी चरणधूलि प्रदान कर परम मुक्ति प्रदान करते हैं।

स्वामी जी ने बताया कि श्री राम कथा का यह पक्ष समाज में आज भी आक्षेप बाणों से हताहत है। अक्सर कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी लोग अहल्या प्रसंग के सन्दर्भ में कहते हैं कि भारतीय संस्कृति तो नारीविरोधी है, जहाँ एक नारी को पुरुष-प्रधान समाज द्वारा बिना उसकी गलती के दंड दिया गया। लेकिन ऐसे लोग ये भूल जाते हैं कि सम्पूर्ण विश्व में यदि किसी संस्कृति में नारी की पूजा होती है तो वह केवलमात्र भारतीय संस्कृति ही है। भारत में तो वैदिक काल से ही ऋषियों ने नारी की महिमा को गाया। न केवल गाया अपितु आत्मदर्शन की सनातन विद्या ब्रह्मज्ञान प्रदान कर नारी की सुप्त ब्रह्मशक्ति को भी जगाया। यहीं प्रक्रिया तो अहल्या प्रसंग में भी घटित हुई थी। गौतम ऋषि ने अहल्या को ब्रह्मज्ञान प्रदान कर ध्यान की स्थिर व अचल अवस्था में शिलावत बैठने की प्रविधि दी ताकि ब्रह्मसाधना के ओज में उसकी सुन्दरता पवित्रता की धवलता से चमक उठे और जगत उसके निष्कलंक आचरण के आगे नतमस्तक हो जाए। सच कहें तो नारी-सशक्तिकरण की अनुपम मिसाल अहल्या प्रसंग समाज के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है। आज की नारी को लगता है कि सौन्दर्य का प्रदर्शन ही उसके सशक्तिकरण का प्रमाण है। लेकिन बाहरी सौन्दर्य-प्रदर्शन तो छिछला है, नारी का वास्तविक सौन्दर्य तो उसकी आत्मा में समाया है। ब्रह्मज्ञान से जब उसके भीतर आत्मा का दिव्य ओज पैदा होगा तो उसकी तेजस्विता के सामने सम्पूर्ण विश्व नत हो जाएगा। हर वासनापूर्ण दृष्टि दग्ध हो स्वाहा हो जाएगी और जगत उसकी पवित्रता को नमन करेगा। यहाँ ब्रह्मज्ञान का अर्थ कोई बाहरी विद्या, जानकारी, या कथा-कहानी नहीं, अपितु आत्मा के ज्योति स्वरुप का प्रत्यक्ष दर्शन करना है जो केवल समय के पूर्ण श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ गुरु ही करवा सकतें हैं। स्वामी जी ने बताया कि आज दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के सामाजिक प्रकल्प ‘संतुलन’ के अंतर्गत समाज में नारी को आत्मदर्शन की यही विद्या ब्रह्मज्ञान प्रदान कर पुनः महिमामंडित पद पर आसीन कर रहे हैं।

संस्थान के प्रतिनिधित्व में स्वामी नरेशानंद जी, साध्वी श्वेता भारती जी एवं साध्वी ज्योति भारती जी आदि उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में शहर के अनेकानेक सम्मानित अतिथि जैसे – श्रीमान विजय पाल आढ़ती जी (विधायक, हापुड़), श्रीमान कुँवर ज्ञानंजय सिंह जी (एस.पी, हापुड़), एडवोकेट श्रीमान प्रशांत त्यागी जी (अध्यक्ष, बीजेपी), श्रीमान दीपक अग्रवाल जी एवं श्रीमती नीरू अग्रवाल जी, श्रीमान सुधांशु महेश्वरी जी एवं श्रीमती प्रीति महेश्वरी जी, श्रीमान अरुण अग्रवाल जी एवं श्रीमती रचना अग्रवाल जी, श्रीमान सुधीर जी आदि उपस्थित रहे। आगामी दिवस श्री राम-जानकी विवाहोत्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाएगा। अतः सभी भक्त श्रद्धालुगण समय से पहुंचकर कथा का लाभ प्राप्त करें।

















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