श्री राम कथा में श्री राम-जानकी विवाहोत्सव की रही धूम , जमकर नाचे श्रद्धालु

श्री राम कथा में श्री राम-जानकी विवाहोत्सव की रही धूम , जमकर नाचे श्रद्धालु
हापुड़।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा में श्री राम-जानकी विवाहोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर ने सीता स्वयंवर प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाराज जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए एक शर्त्त रखी कि जो भी भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी के साथ उनकी पुत्री का विवाह होगा। देश-विदेश से राजा, महाराजा, राजकुमार, देवतागण और राक्षस रूप बदल-बदल कर उस धनुष-यज्ञ में पहुँचे। लेकिन धनुष को उठाना तो दूर कोई उसको तिल-भर हिला भी नहीं पाया। तब मुनिवर विश्वामित्र जी ने प्रभु श्री राम को धनुष तोड़ने की आज्ञा दी और श्री राम ने वह धनुष तोड़ डाला। यूँ तो स्वयंवर की शर्त्त मात्र धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना था, किन्तु विश्वामित्र जी ने धनुष तोड़ने की बात कह दी। आखिर ऐसा क्यों?
यह धनुष प्रतीक है हमारे मस्तिष्क में बरसों से पैठी मृत्त-मान्यताओं व अंध-धारणाओं का, जिनका टूटना अति-अनिवार्य है अगर हम भी अपनी आत्मा रुपी जानकी का मिलन परमात्मा रुपी राम से करवाना चाहते हैं। ऐसी ही एक अंध-धारणा है जो आज आस्तिक वर्ग के भीतर सर्वाधिक प्रचलित है और जिसने जन्मों से हमारा प्रभु से मिलने का मार्ग अवरुद्ध कर रखा है। वो यह कि ईश्वर को कभी देखा ही नहीं जा सकता। लेकिन हमारे समस्त वेद, शास्त्र, पुराण, ग्रन्थ एकमत में यह तथ्य प्रमाणित करते हैं कि ईश्वर तर्क-वितर्क, मन, वाणी, कथा-कहानी और बुद्धि का नहीं, अपितु प्रत्यक्ष दर्शन का विषय है। हाँ, वो बाहरी स्थूल चर्म-चक्षुओं से नहीं दिखता, उसे देखने को लिए आवश्यकता है उस दिव्य चक्षु की जिसे शास्त्रों में शिवनेत्र, दिव्यदृष्टि, दसम द्वार, आज्ञाचक्र इत्यादि नामों से संबोधित किया गया और जो हमारी भौहों के मध्य स्थित है। जब समय के पूर्ण सद्गुरु ब्रह्मज्ञान की दीक्षा देते हैं तो वह मस्तक पर हाथ रख इसी दिव्य नेत्र को तत्क्षण ही उद्घाटित कर देते हैं और फिर ईश्वर का दिव्य रूप हमें हमारे ही भीतर दिखाई देता है। तब इस अंध-धारणा का धनुष-भंग होते ही हमारी आत्मा भी परमात्मा के वरण को सज्ज हो उठती है। अतः एक तत्ववेत्ता सद्गुरु की कृपा से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर उस ईश्वर का घट में दर्शन प्राप्त करना ही हमारे जीवन का परमध्येय है।
इस मौके पर साध्वी श्वेता भारती , साध्वी वसुधा भारती , दीपक अग्रवाल , नीरू अग्रवाल , सुधांशु महेश्वरी, प्रीति महेश्वरी, अरुण अग्रवाल, रचना अग्रवाल , अतुल चौकडात , अखिलेश , दीपक , राजपाल सिंह लवलीन गुप्ता आदि मौजूद थे।











