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हापुड़ का अतरपुरा चौपला बन गया था जलियांवाला बाग, अंग्रेजों की गोली से शहीद हो गए चार देशभक्त, दी श्रद्धांजलि

हापुड़ का अतरपुरा चौपला बन गया था जलियांवाला बाग, अंग्रेजों की गोली से शहीद हो गए चार देशभक्त, दी श्रद्धांजलि
, हापुड (यथार्थ अग्रवाल मुन्ना)।

1942 भारत छोड़ो आंदोलन के समर्थन में नगर में भी एक अभूतपूर्व जलूस निकाला गया ।11 अगस्त 1942 को निकला गया जुलूस ने एक भारी प्रदर्शन का रूप लिया जो नगर की विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए अतरपुरा चौराहा पर एकत्र हुआ। जलूस का नेतृत्व हापुड़ के अनेक स्वतंत्रता सेनानी संयुक्त रूप से कर रहे थे। जुलूस का मकसद नगर पालिका भवन पर तिरंगा लहराना था। जुलूस के अतरपुरा चौराहे पर पहुंचते ही पुलिस ने उसे चारों ओर से घेर लिया और जब जुलूस का नेतृत्व कर रहे लोगों ने नगर पालिका पर तिरंगा फहराने का प्रयास किया तो पुलिस ने भारी गोलीबारी की इस गोलीबारी में हापुड़ के चार सपूत श्री गिरधारी लाल जी श्री रामस्वरूप जी श्री आंगन लाल जी और श्री मांगे लाल जी शहीद हो गए। उनकी ही याद में 1942 से आज तक लगातार 11 अगस्त को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 1942 शहीद स्मारक समिति के नेतृत्व में होता आ रहा है ।
1942 शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष सुरेश चंद्र संपादक ने कहा कि हम अपने शहीदों के और अपने क्रांतिकारीयों के ऋणी है जिन्होंने हमें आजाद भारत में सांस लेने का सौभाग्य प्रदान किया। समिति के महासचिव पत्रकार आशुतोष आजाद ने कहा कि जो कौम अपने शहीदों को भुला देती है वह मर जाती है हमें देश को आगे बढ़ाने के लिए , शहीदों के सपने को साकार करने के लिए भारत को निरंतर एक साथ एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा।
इस अवसर पर आई नरेंद्र कुमार मित्तल, डॉ आर डी शर्मा, मोहनलाल तेजियांन, उमेश कुमार शर्मा, राजकुमार पंजाबी, ललित कुमार अग्रवाल (छावनी वाले) राजीव गुडलक, नवनीत आजाद, इरा शर्मा, चंद्रकांत, प्रवीण शर्मा, नरेश चंद्र शर्मा , प्रवीण कुमार शर्मा, सुधीर कुमार गुप्ता, सतीश अग्रवाल, दीपक, अखिल, अमित कुमार अग्रवाल, आदि अनेक लोग उपस्थित थे















