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ब्रह्मज्ञानी युवा सृजन-सेनानी ही कर सकते हैं राष्ट्र का नवनिर्माण- डॉ. सर्वेश्वर

ब्रह्मज्ञानी युवा सृजन-सेनानी ही कर सकते हैं राष्ट्र का नवनिर्माण- डॉ. सर्वेश्वर

अर्जुन नगर के सामने वाला ग्राउंड, स्वर्ग आश्रम रोड, हापुड़ में चल रही सात दिवसीय श्री राम कथा के षष्ठम दिवस, अर्थात्‌ 22 मई, 2026 – शुक्रवार को दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर जी ने सुंदरकांड गाथा को भक्तों के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सुंदरकांड में गोस्वामी तुलसीदास जी ने भक्त हनुमान की जानकी-अन्वेषण यात्रा का वर्णन किया है जिसमें उन्होंने अनेक बाधाओं को पार कर माँ सीता की खोज की। समुद्र-यात्रा के दौरान सबसे पहले मैनाक नामक पर्वत ने उन्हें विश्राम करने के लिए कहा लेकिन हनुमान जी ने कहा मैं प्रभु श्री राम का कार्य किए बिना विश्राम कर ही नहीं सकता। मैनाक को स्पर्श कर हनुमान जी बिना रुके आगे बढ़ गए। तदुपरांत सुरसा के विशाल मुख को अपने विवेक से लाँघ हनुमान जी ने सिंहिका का वध किया और लंका में माँ जानकी की खोज कर उन्हें श्री राम का संदेश प्रदान कर दिया। केवल इतना ही नहीं, वापिस जाते-जाते रावण को अपने प्रभु की शक्ति की एक झलक दिखने के लिए हनुमान जी ने पूरी की पूरी लंका को ही जला डाला।

कथाव्यास जी ने सुंदरकांड गाथा का मर्म समझाते हुए बताया कि जब संस्कृति रुपी जानकी अश्लीलता, वासना व अमर्यादा रूपी रावण की लंका में कैद हो जाए तो राष्ट्र युवाओं की ओर आस भरी दृष्टि से निहारता है कि अब ये उठेंगे और हनुमान बन इस लंका को जला डालेंगे। लेकिन अफ़सोस आज के युवा या तो नशे की दलदल में धँसे मदहोश घूम रहे हैं या फिर चरित्रहीनता की अंधी खाई में गिर संस्कारों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। धिक्कार है उन युवाओं को जो चंद सिक्कों के लालच में अपनी ही मातृभूमि से दगा कर भारतीय संस्कारों का गला घोंट देते हैं। युवा तो वो होता है, जिसमें वायु सा वेग हो; जो आलस्य रुपी मैनाक का तत्परता से त्याग करने का साहस रखता हो; जो पैसे या झूठे यश के लालच की सुरसा के समक्ष न झुके, न रुके और जो द्वेष-दम्भ की सिंहिका को रौंद “चरैवेति चरैवेति” की धुन गुनगुनाना जानता हो। ऐसे युवा ही हनुमान जी की तरह भक्ति और शक्ति का संगम बन नशे व वासना की हर लंका को जला पाते हैं। आज दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी “बोध” प्रकल्प के तहत युवाओं को ब्रह्मज्ञान प्रदान कर ऐसे ही सच्चे सृजन सेनानी बना रहे हैं, जिनमें अपनी संस्कृति के लिए मिटने-मरने व देश के लिए बहुत कुछ करने का जज़्बा है। ये युवा नशा करते हैं तो देश-भक्ति का। वो नशा जो हमारे देश भक्तों ने किया था और भरी जवानी में देश की आज़ादी के लिए फाँसी के फंदों को चूम लिया था। ऐसे ब्रह्मज्ञानी युवा सेनानियों का काफिला निश्चित ही भारत देश का नवनिर्माण कर इसे पुन: जगद्गुरु के सर्वोच्च पद पर आसीन करेगा।
इस अवसर पर वाद्यवृन्दों द्वारा “रंग दे बसंती” गीत गाकर श्रोताओं को देशभक्ति के रंग में निहाल किया गया।   

संस्थान के प्रतिनिधित्व में साध्वी श्वेता भारती जी एवं साध्वी ज्योति भारती जी आदि उपस्थित रहीं। इस अवसर पर शहर के प्रतिष्ठित अतिथिगण सम्मिलित हुए, जिनमें श्रीमान दीपक अग्रवाल जी एवं श्रीमती नीरू अग्रवाल जी, श्रीमान सुधांशु महेश्वरी जी एवं श्रीमती प्रीति महेश्वरी जी, श्रीमान अरुण अग्रवाल जी एवं श्रीमती रचना अग्रवाल जी, श्रीमान संजीव कृष्णा जी, श्रीमान दिनेश जी, श्रीमान विजेंद्र पंसारी जी आदि सम्मिलित रहे।

कार्यक्रम का समापन मंगल आरती एवं प्रसाद वितरण से किया गया। आगामी दिवस प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक के साथ दीपावली उत्सव बड़े ही धूम- धाम से मनाया जाएगा। अतः समस्त भक्तगण यथासमय उपस्थित होकर कथा का आनंद लें।

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