सत्य अहिंसा प्रेम हो, ना हो द्वेष कलेश,हो गांधी के स्वप्न का,अपना भारत देश’-डॉ.अनिल वाजपेयी
हापुड़(अमित अग्रवाल मुन्ना)। अखिल भारतीय साहित्य लोक के तत्वावधान में एक ऑन लाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता डा. अनिल बाजपेई ने कि तथा मंच संचालन गरिमा आर्य ने किया। इस अवसर पर डा. आराधना बाजपेई ने पढ़ा, कश्ती में छेद हो तो काम चलता नहीं है,संध्या के बिना सूर्य कभी ढलता नहीं है,समंदर ने बुझाई है कब प्यास किसी की,नदियों के बिना कभी काम चलता नहीं है। गरिमा आर्य ने पढ़ा, ‘ लाल बहादुर शास्त्री जी भारत मां के लाल,व्रत करने की करें अपील वो संस्कारों की ढाल,हों जवान या हों किसान सबका रखा मान,एक समर्पित नारा उनका ‘जय जवान जय किसान ‘ अध्यक्षता करते हुए डा. अनिल बाजपेई ने पढ़ा, ‘ सत्य अहिंसा प्रेम हो, ना हो द्वेष कलेश,हो गांधी के स्वप्न का,अपना भारत देश।’ मुक्ता शर्मा ने पढ़ा,’ यदि भारत को विश्व गुरु बनाना है,तो सबसे पहले सत्य,अहिंसा प्रेम अपनाना है,’ डा मीनू शर्मा ने पढ़ा , सबक अहिंसा का सिखलाया,प्रेम भक्ति का पाठ पढ़ाया,नवज्योति से भरकर खुद को नवभक्ति का पाठ पढ़ाया, डा मीनू वर्मा ने पढ़ा,गांधी जी हमारे स्वतंत्र भारत की आधार शिला हैं, एक पूज्य शिलालेख हैं,सभी के दुलारे हैं,सभी के बहुत प्यारे हैं।’ डा शुभम त्यागी ने पढ़ा , हिंसा की जो बात करें ना ऐसे मेरे गांधी थे,देश से अपने प्रेम करें जो ऐसे मेरे गांधी थे, सादा जीवन उच्च विचार वाला जिनका नारा था, अच्छा देखें,अच्छा बोलें,अच्छा ही वह सुनने वाले ऐसे मेरे गांधी थे। सुदेश यादव दिव्य ने पढ़ा,लाजपत सा लाला नहीं, ना भगत सिंह सा कोई सरदार है, अशफाक कहीं आज मिलते नहीं,लाल बहादुर शास्त्री जैसे देशभक्त की दरकार है । अंत में डा. मीनू शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया