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हापुड़ में खूंखार हुए बंदर , घर के बाहर खड़े मासूम बच्चे को बंदरों के झुंड ने हमला कर किया घायल

हापुड़ में खूंखार हुए बंदर , घर के बाहर खड़े मासूम बच्चे को बंदरों के झुंड ने हमला कर किया घायल

महिलाओं से लेकर बच्चें तक सहमें, रोजाना 100 लोग पहुंच रहे हैं सरकारी अस्पताल

,हापुड़ (यर्थाथ अग्रवाल मुन्ना)।

नगर पालिका परिषद की उदासीनता के चलते हापुड़ में रोजाना बंदरों व कुत्तों का आंतक बढ़ता ही जा रहा है। हर गली ,मौहल्लें, कालोनी में बंदर आती जाती महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को अपना निशाना बना रहे हैं। घर के बाहर खड़े एक मासूम बच्चें पर बंदरों के झुंड ने हमला कर घायल कर दिया।

जानकारी के अनुसार हापुड़ के मोहल्ला पटेल नगर निवासी व्यापारी विभोर अग्रवाल का बेटा
अधिराज अपने घर के गेट पर खड़ा था, तभी बंदरों के झुंड ने उस पर हमला कर घायल कर दिया। चीख-पुकार की आवाज सुनकर राहगीरों ने बच्चे को बंदरों के झुंड से मुक्त करवाया।

बंदरों का आंतक बढ़ता ही जा रहा है।

शहर और आसपास के एरिया में बंदरों का आंतक बढ़ता ही जा रहा है। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शायद ही ऐसा कोई दिन हो, जब बंदर किसी को काटकर जख्मी नहीं कर रहे हो। लोगों का कहना है कि कई बार बंदरों को पकड़ने के लिए नगर पालिका के साथ-साथ जिला प्रशासन के अधिकारियों को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। उसके बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। शहर के आर्य नगर, राधापुरी, श्रीनगर, जवाहर गंज, सरस्वती इन्क्लेब , शिवपुरी, मोदीनगर रोड, मेरठ रोड, बुलंदशहर रोड आदि एरिया के कई मोहल्ले में बंदर का आंतक है।
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स्वास्थ्य विभाग में हर दिन पहुंच रहे 100-150 मरीज
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इन दिनों में बंदरों व स्ट्रीट डॉग का स्वभाव बदल जाता है। ऐसे में इस जानवर से बचने की आवश्यकता है। कुत्ता व बंदर काटने पर सबसे पहले रैबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए। यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बात करें तो हर दिन यहां पर 100 लोग हर दिन रैबीज लगवाने के लिए आते हैं। पिछले पंद्रह दिनों में अस्पताल में 2000 से अधिक मरीज रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच चुके हैं।
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बंदर के काटने पर बढ़ जाता है रेबीज का खतरा

कुत्ते और बंदरों का आतंक रात के समय अधिक बढ़ जाता है। ये झुंड में रहते हैं और मौका मिलते ही ये लोगों पर हमला कर देते हैं। वहीं कुत्तों की तो हालत जाती है कि सड़कों से गुजरने वाले वाहनों के कुत्ते दौड़ लगाना शुरू कर देते हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो कुत्ते के काटने पर रेबीज का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए एंटी रेबीज इंजेक्शन अवश्य लगवाना चाहिए।
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छह माह में दर्जनों पर किया हमला
शहर से लेकर गांव तक आवारा कुत्ते और बंदरों का आतंक है। पिछले छह माह में दोनों दर्जनों मासूमों और महिला-पुरुषों पर हमला कर चुके हैं।

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