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ग्राम प्रधानों का प्रशिक्षण के दौरान टीबी के प्रति संवेदीकरण किया


जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने कोविडरोधी टीकाकरण के लिए जागरूक किया
सिंभावली ब्लॉक से शुरू हुआ ट्रेनिंग के दौरान संवेदीकरण कार्यक्रम

हापुड़ । सिंभावली ब्लॉक में ग्राम प्रधानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य के प्रति संवेदीकरण किया गया। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. संजीव कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल ग्राम प्रधानों को कोविड टीकाकरण की महत्ता के बारे में बताया। उन्होंने कहा तीसरी लहर से पहले जितना अधिक से अधिक टीकाकरण हो जाए उतना अच्छा है। टीकाकरण कोविड के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान करता है। टीकाकरण के बाद यदि किसी को कोविड संक्रमण होता भी है तो जानलेवा नहीं होता। क्षय रोग विभाग की ओर से ग्राम प्रधानों को टीबी के बारे में जानकारी दी गई। लक्षणों की जानकारी के साथ ही यह भी बताया टीबी की शंका होने पर क्या करें? जांच कराने कहां जाए?
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. संजीव कुमार ने ग्राम प्रधानों को कोविड टीकाकरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि नजदीकी टीकाकरण केंद्र के बारे में कोविन पोर्टल से कैसे जानकारी ली सकती है। पहली डोज लेने के कितने दिन बाद दूसरी डोज लेनी होती है। डीआईओ ने बताया कोविडशील्ड और कोवैक्सीन, दोनों ही टीके पूरी तरह सुरक्षित हैं, इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। कोई भी टीका लगवाने के बाद बुखार आने की संभावना रहती है, वैसे ही कोविडरोधी टीका लगवाने के बाद होता है। बुखार आने पर केवल पैरासिटामोल लेने से आराम आ जाता है। टीका लगवाने के बाद बुखार आने से डरने की जरूरत नहीं है, यह स्वभाविक है।

क्षय रोग विभाग से प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहुंचे जिला पीपीएम कोर्डिनेटर सुशील चौधरी ने बताया टीबी माइकोवैक्टीरियम वैक्टीरिया से होती है। आमतौर पर यह फेफड़ों पर वार करती है लेकिन किसी भी अंग में टीबी होना संभव है। टीबी के शुरूआती लक्षण लंबे समय तक खांसी रहना। अचानक वजन कम होने लगना। हल्का बुखार रहना। रात में सोते समय पसीना आना। ठंड लगना। छाती में दर्द, खांसने पर खून आना। थकान रहना और भूख कम लगना आदि होते हैं। 15 दिन से अधिक खांसी रहने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सक से संपर्क करें। स्पुटम (बलगम) की जांच कराएं। क्षय रोग विभाग की ओर निशुल्क जांच और उपचार सुविधा उपलब्ध है। नियमित उपचार के बाद टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है। उपचार के दौरान शासन की ओर से हर माह पांच सौ रूपए का भुगतान मरीजे के खाते में किया जाता है ताकि वह बेहतर पोषण प्राप्त कर सके। क्षय रोग विभाग से टीबी संवेदीकरण कार्यक्रम में जिला पीएमडीटी समन्वयक मनोज कुमार भीउपस्थित रहे।



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