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कवि प्रेम निर्मल द्वारा संपादित कलम के सिपाही काव्य संकलन का हुआ विमोचन ,कवियों को किया सम्मानित

हापुड़ (अमित मुन्ना)।

हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में यहां श्री चंडी मंदिर रोड स्थित चैंबर ऑफ कॉमर्स में कवि प्रेम निर्मल द्वारा संपादित कलम के सिपाही काव्य संकलन का विमोचन किया गया।
समारोह की अध्यक्षता योगेंद्र कुमार मुन्नू ने की एवं मंच का संचालन डा. अनिल बाजपेई ने किया।

समारोह की मुख्य अतिथि डा.आराधना बाजपेई,अध्यक्ष योगेंद्र मुन्नू एवं कार्यकारी अध्यक्ष रामासरे गोयल के साथ विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलन करके समारोह का शुभारंभ किया।

राम आसरे गोयल ने डा. आराधना बाजपेई को शाल, प्रतीक,अंगवस्त्र, सम्मान राशि आदि से शशि सुषमा स्मृति में नारी गौरव सम्मान से सम्मानित किया।,इसके अलावा कवियत्री गरिमा त्यागी सहित अन्य को भी सम्मानित किया गया।

विमोचन समारोह में बाबू लक्ष्मी नारायण बी ए, कैलाश चंद मित्तल,मधुसूदन दयाल संपादक,लाला टीका राम तेलवाले,महावीर प्रसाद शर्मा,विद्या पदम क्षेम चंद सुमन, परिषद के पूर्व संरक्षक,शिक्षाविद,काव्यप्रेमी,एवं स्वतंत्रता सैनानियों की स्मृति में कवि प्रेम निर्मल,शायर फसीह चौधरी,राम आसरे गोयल, डा.अनिल बाजपेई,श्री राजेश मंगला, मोहन लाल तेजियान,महावीर मधुर को उनके हिंदी साहित्य के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह के अध्यक्ष योगेंद्र मुन्नू जी,एवं मुख्य अतिथि डा. आराधना बाजपेई ने कहा कवि युग का प्रतिनिधि होता है।वह एक सिपाही के समान समाज की विसंगतियों एवं विषमताओं से निर्भीकता के साथ लड़ता आया है।
अतः कलम के सिपाही काव्य संकलन देश में मील का पत्थर साबित होगा।
विशिष्ट अतिथि ललित कुमार छावनी वाले ने कहा कवि समाज का मार्गदर्शन करते हैं।

समारोह में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, वरिष्ठ कवि प्रेम निर्मल ने पढ़ा,कह निर्मल कविराय कलम का वही सिपाही, बिना बिके जो सत्य धर्म की लड़े लड़ाई।

डा आराधना बाजपेई ने पढ़ा, आसमान से तारे जब टूटने लगे,दीप से उजाला ही जब रूठने लगे,कैसे बचेगी देश की अस्मत बताइए,जब कहार डोलियों को लूटने लगे।

डा पुष्पा गर्ग ने पढ़ा,ब्रह्मा ने हमको दिया,यह अद्भुत उपहार,शुरू हुआ नववर्ष से,नवजीवन संचार।

राम आसरे गोयल ने पढ़ा, कौन हृदय में बोल रहा है,प्राणों में रस घोल रहा है,तुम हो मेरी प्राण कोकिला,स्वर मेने पहचान लिया है।

डा अनिल बाजपेई ने पढ़ा, परम पिता तू ही जिसने संभाला है, छंट रहा देखो तिमिर अब उजाला है,छंटेंगे में संकटों के शीघ्र अब,उसी प्रभु ने अनिल इनसे निकाला है।

शायर फसीह चौधरी ने पढ़ा,मुहब्बत की हम दास्तान छोड़ आए,हम उनके लिए आसमान छोड़ आए।

शायरा मुशर्रफ चौधरी ने पढ़ा,ये हमारी जिंदगी की राहतें हैं और हम,ख्वाब रोशन हैं,मुनव्वर चाहते हैं और हम।
पूनम अग्रवाल ने पढ़ा, मां तुम सिंह हो, मां तुम मृग हो, मां तुम सुहाग हो, मां तुम बैराग हो।
मोहन लाल तेजि यान ने पढ़ा,
ना कुछ कहते बनता है,ना कुछ सुनते बनता है।

वर्षा जैन ने पढ़ा,चांदनी जब मुस्काई,आग सी मन में लगाई,भूल बैठे थे जिन्हें हम,फिर उन्हीं की याद आई।

महावीर वर्मा मधुर ने पढ़ा प्रेम प्रभु की पूजा है,और प्रेम ही आराधना,और प्रेम से ही संभव है प्यारे, अरि को पल में साधना।

अवनीत समर्थ ने पढ़ा,कलम कवि की अगर चलेगी,वीरों का सत्कार करेगी,
विकास विजय ने पढ़ा,मेरी जबान से निकले,वो शब्द नहीं वो तीर हैं,
भारत मां जकड़ रही वो,दुश्मन की जंजीर है।

मनीषा गुप्ता ने पढ़ा,आजकल वो मुझे रोज आजमाता है,कभी नखरे कभी गुस्सा दिखाता है।

शहवार नावेद ने पढ़ा बस इस उम्मीद पर रोशन है जिंदगी की शम्मा, कभी तो शाम ढलेगी,बहार लौट आएगी,
मंगला जी ने भी काव्य पाठ किया।

समारोह में राम अ वतार बजाज,ललित अग्रवाल छावनी वाले,जितेंद्र गुप्ता,अनिल मित्तल,सुरेश चंद संपादक,सुधीर जैन अजय मंगल सर्राफ,हर्ष मंगल,ब्रम्हानंद शर्मा,रामकिशन तेल वाले पराग सक्सेना तथा अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।


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