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मोनार्ड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री घोटालें का मामला पुलिस ने 11 वें आरोपी को हरियाणा से किया गिरफ्तार, भारी मात्रा में फर्जी मार्कशीट बरामद

मोनार्ड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री घोटालें का मामला

पुलिस ने 11 वें आरोपी को हरियाणा से किया गिरफ्तार, भारी मात्रा में फर्जी मार्कशीट बरामद

दिल्ली, हरियाणा , पंजाब, एनसीआर तक में फैला है फर्जी डिग्रियों का मकड़जाल, करोड़ों रुपए के घोटाले की आंशका

नोएडा बाईक घोटाले का मास्टर माइंड है आरोपी चेयरमेन

पांच हजार रुपए में तैयार डिग्रियों को 40 हजार से लेकर चार लाख रुपए में बेचते थे

हापुड़(यर्थाथ अग्रवाल मुन्ना,)।

थाना पिलखुवा क्षेत्र के निजामपुर स्थित मोनार्ड यूनिवर्सिटी में यूपी एसटीएफ ने छापेमारी कर बड़े पैमाने पर बनाई जा रही फर्जी डिग्रियों का भंडाफोड़ करने के बाद पुलिस ने 11 वें आरोपी को हरियाणा से गिरफ्तार कर भारी मात्रा में मार्कशीट बरामद की है।

जानकारी के अनुसार पिलखुवा स्थित मोनाड विश्वविद्यालय में शनिवार शाम को यूपी एसटीएफ के सीओ संजीव कुमार के नेतृत्व में 50 अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम ने छापेमारी कर फर्जी अंकपत्र, डिग्रियां और अन्य शैक्षिक दस्तावेज,लैपटॉप, हार्डडिस्क, सर्वर सिस्टम बरामद किए थे। मामले में पुलिस ने चेयरमैन मेरठ के कंकड़खेड़ा निवासी बिजेंद्र हुड्डा, संदीप सहरावत, कमल बत्रा, विपुल ताल्या चौधरी, इमरान, गौरव शर्मा, मुकेश ठाकुर,नितिन सिंह ,सनी कश्यप, कुलदीप , 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

थाना प्रभारी निरीक्षक पटनीश कुमार ने बताया कि मामले में यूपी एसटीएफ व पिलखुवा पुलिस ने हरियाणा से 11 वें आरोपी राजेश को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में फर्जी व व्लैक मार्कशीट व मोहरें ,प्रिंटर आदि बरामद किए हैं।

कौन है बिजेंद्र सिंह हुड्डा

यूनिवर्सिटी के मालिक चौधरी बिजेंद्र सिंह का नाम 15 हजार करोड़ के बाइक बोट घोटाले में भी सामने आया था। जिस पर पांच लाख रुपए का ईनाम घोषित किया गया था। वहीं पिछले लोकसभा चुनाव में बिजेंद्र सिंह बसपा के टिकट पर लगे थे। जिसमें उनको हार का मुंह देखना पड़ा था। 2018 में बिजेंद्र सिंह ने 57 एकड़ में फैली इस यूनिवर्सिटी को 160 करोड़ में खरीदा था।

बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य भी जब्त

एसटीएफ द्वारा की गई छापेमारी के दौरान यूनिवर्सिटी परिसर से लैपटॉप, हार्डडिस्क, सर्वर सिस्टम और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इन सभी डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। जिससे यह पता चल सके कि फर्जी दस्तावेजों का निर्माण और वितरण कैसे किया जा रहा था। साथ में इसमें कौन-कौन शामिल थे।

जांच में दस्तावेज फर्जी निकले

जांच में पता चला कि बरामद दस्तावेजों को फर्जी बताया, क्योंकि इनमें प्रयुक्त एनरोलमेंट नंबर विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में नहीं थे। बरामद दस्तावेजों पर विश्वविद्यालय का नाम और डिजिटल हस्ताक्षर थे, जो फर्जी पाए गए। यह कार्रवाई शिक्षा क्षेत्र में फर्जीवाड़े के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है।

दो हजार फर्जी मार्कशीट बरामद

यूनिवर्सिटी हरियाणा की राजेश एक प्रिंटिंग प्रेस से पीएचडी, एलएलबी, बी फार्मा, डी फार्मा, बीटेक समेत कई अन्य कोर्सेस की फर्जी डिग्रियां बनाकर आगरा से लेकर उत्तराखंड, एनसीआर, हरियाणा, पंजाब आदि राज्यों में
बेच रहा था। छापेमारी के दौरान दो हजार से अधिक फर्जी डिग्रियां बरामद हुईं हैं। दो अन्य यूनिवर्सिटी भी मोनाड के संपर्क में बताई जा रही हैं। प्रेस मालिक को एक डिग्री पर पांच हजार रुपए मिलते थे।

पहले भी विवादों में रहा है मोनाड यूनिवर्सिटी

हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी इससे पहले भी कई विवादों में घिर चुकी है। विश्वविद्यालय पर पहले भी अवैध दाखिले, फर्जी डिग्री और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं।

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