महिला जागृति फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित हुआ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, किया सम्मानित

महिला जागृति फाउंडेशन हापुड़ ने मनाई अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, हुआ भव्य कार्यक्रम
हापुड़ के सोटावाली में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। जिसमें उद्घाटक मा. के. बी मंसारे प्रदेश अध्यक्ष, म.प्र (एन. जी . ओ पब्लिक फोरम) मुख्य अतिथि डॉ नीलम सिंह (रिदम हॉस्पिटल) विशिष्ट अतिथि आभा बाना सीमा जी बुलंदशहर डॉक्टर सीमा सिंह अवंतिका, रामशरण बौद्ध, बरखा भोपाल, म . प्र सीमा शर्मा सभासद चेतनपुरा कार्यक्रम आयोजन अमित मिश्रा , साहिल अलु , सचिन जेरी, राजकुमार, मनीष पौल, रमन सिंह,इस कार्यक्रम को संचालन करने वाले ऋषिपाल गौतम, सभा की समाप्ति कैलाश हल्द्वानी ने की तथा गीता पैट्रिक राष्ट्रीय अध्यक्षा महिला जागृति फाउंडेशन की फाउंडर अपने संबोधन में कहा इस सभा में उपस्थि सभी लोगों का स्वागत और शुक्रिया 🙏 उपस्थित सभी सम्मानित भाइयों एवं बहनों तथा प्यारे बच्चों…
आप सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज हम यहां नारी शक्ति, त्याग, समर्पण और साहस का सम्मान करने के लिए एकत्रित हुए हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि महिलाएं केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की असली ताकत हैं।
महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है—चाहे वह शिक्षा हो, विज्ञान हो, राजनीति हो, खेल हो या व्यापार। हमारे देश की महान हस्तियों जैसे क्लारा जेटकिंग, मदर टेरेसा, सावित्रीबाई फुले, रमाबाई, झलकारी बाई, फातिमा शेख, तथा अन्य महिलाओं ने यह सिद्ध किया है कि यदि अवसर मिले तो महिलाएं किसी से कम नहीं हैं।
नारी केवल “घर की लक्ष्मी” नहीं है, वह समाज की प्रेरणा है, राष्ट्र की प्रगति की पहचान है। एक शिक्षित और सशक्त महिला पूरे परिवार और समाज को आगे बढ़ाती है।
आज भी हमें यह सुनिश्चित करना है कि—
हर बेटी को शिक्षा मिले
हर महिला को सम्मान मिले
हर नारी को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले
हमें मिलकर ऐसा समाज बनाना है जहाँ महिलाओं को बराबरी का अधिकार और सुरक्षित वातावरण मिले। जब नारी सशक्त होगी, तभी हमारा देश सशक्त होगा।
आइए, इस महिला दिवस पर हम संकल्प लें—
✔ महिलाओं का सम्मान करेंगे
✔ उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे
✔ उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस
एक मजदूर आंदोलन से उच्चा है। इसका बीजा रोपण साल 1908 में हुआ था। 15 हजार औरतों ने न्यूयार्क शहर में मार्च निकाल कर नौकरी में कम घंटे की माँग की थी, उन्हें बेहतर वेतन दिया जाय, और मतदान करने का अधिकार मिले –
एक साल बाद ही सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया। ये आइडिया एक महिला का ही था।
क्लारा जेटकिंग ने 1910 में कामकाजी महिलाओं की एक इंटरनेशनल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया।
उस वक्त कॉन्फ्रेंस में 17 देशों की 100 महिलाए मौजूद थीं, उन सभी ने इस सुझाव का समर्थन किया।
सबसे पहले साल 1911 में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विजरलैंड में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था।
लेकिन तकनीकी तौर पर इस साल हम . अंतर्राष्ट्रीय दिवस मना रहे हैं।
1917 में युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने ब्रेड एंड पीस यानि खाना और शांति की मांग की थी। महिलाओं की हड़ताल ने वहां के सम्राट निकोलस को पद
छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। अंतरिम सरकार ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया। उस समय रूस में जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था। जिस दिन महिलाओं यह हड़ताल शुरू की थीं वह तारीख़ 23 फरवरी ग्रगरियन कैलेंडर में यह दिन 8 मार्च का था, इसके बाद ही अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है। जय भारत, जय संविधान, जयहिंददिनांक 8 मार्च 2026 को महिला जागृति फाउंडेशन के माध्यम से उत्तर प्रदेश, जिला हापुड़ के सोटावाली में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। जिसमें उद्घाटक मा. के. बी मंसारे प्रदेश अध्यक्ष, म.प्र (एन. जी . ओ पब्लिक फोरम) मुख्य अतिथि डॉ नीलम सिंह (रिदम हॉस्पिटल) विशिष्ट अतिथि आभा बाना सीमा जी बुलंदशहर डॉक्टर सीमा सिंह अवंतिका, रामशरण बौद्ध, बरखा भोपाल, म . प्र सीमा शर्मा सभासद चेतनपुरा कार्यक्रम आयोजन अमित मिश्रा , साहिल अलु , सचिन जेरी, राजकुमार, मनीष पौल, रमन सिंह,इस कार्यक्रम को संचालन करने वाले ऋषिपाल गौतम, सभा की समाप्ति कैलाश हल्द्वानी ने की तथा गीता पैट्रिक राष्ट्रीय अध्यक्षा महिला जागृति फाउंडेशन की फाउंडर अपने संबोधन में कहा इस सभा में उपस्थि सभी लोगों का स्वागत और शुक्रिया 🙏 उपस्थित सभी सम्मानित भाइयों एवं बहनों तथा प्यारे बच्चों…
आप सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज हम यहां नारी शक्ति, त्याग, समर्पण और साहस का सम्मान करने के लिए एकत्रित हुए हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि महिलाएं केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की असली ताकत हैं।
महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है—चाहे वह शिक्षा हो, विज्ञान हो, राजनीति हो, खेल हो या व्यापार। हमारे देश की महान हस्तियों जैसे क्लारा जेटकिंग, मदर टेरेसा, सावित्रीबाई फुले, रमाबाई, झलकारी बाई, फातिमा शेख, तथा अन्य महिलाओं ने यह सिद्ध किया है कि यदि अवसर मिले तो महिलाएं किसी से कम नहीं हैं।
नारी केवल “घर की लक्ष्मी” नहीं है, वह समाज की प्रेरणा है, राष्ट्र की प्रगति की पहचान है। एक शिक्षित और सशक्त महिला पूरे परिवार और समाज को आगे बढ़ाती है।
आज भी हमें यह सुनिश्चित करना है कि—
हर बेटी को शिक्षा मिले
हर महिला को सम्मान मिले
हर नारी को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले
हमें मिलकर ऐसा समाज बनाना है जहाँ महिलाओं को बराबरी का अधिकार और सुरक्षित वातावरण मिले। जब नारी सशक्त होगी, तभी हमारा देश सशक्त होगा।
आइए, इस महिला दिवस पर हम संकल्प लें—
✔ महिलाओं का सम्मान करेंगे
✔ उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे
✔ उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस
एक मजदूर आंदोलन से उच्चा है। इसका बीजा रोपण साल 1908 में हुआ था। 15 हजार औरतों ने न्यूयार्क शहर में मार्च निकाल कर नौकरी में कम घंटे की माँग की थी, उन्हें बेहतर वेतन दिया जाय, और मतदान करने का अधिकार मिले –
एक साल बाद ही सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया। ये आइडिया एक महिला का ही था।
क्लारा जेटकिंग ने 1910 में कामकाजी महिलाओं की एक इंटरनेशनल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया।
उस वक्त कॉन्फ्रेंस में 17 देशों की 100 महिलाए मौजूद थीं, उन सभी ने इस सुझाव का समर्थन किया।
सबसे पहले साल 1911 में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विजरलैंड में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था।
लेकिन तकनीकी तौर पर इस साल हम . अंतर्राष्ट्रीय दिवस मना रहे हैं।
1917 में युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने ब्रेड एंड पीस यानि खाना और शांति की मांग की थी। महिलाओं की हड़ताल ने वहां के सम्राट निकोलस को पद
छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। अंतरिम सरकार ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया। उस समय रूस में जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था। जिस दिन महिलाओं यह हड़ताल शुरू की थीं वह तारीख़ 23 फरवरी ग्रगरियन कैलेंडर में यह दिन 8 मार्च का था, इसके बाद ही अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है।
सभा में उपस्थित मुंद्रेश गौतम, नमिता, काजल, कुसुम, प्रमोद कुमार, वीर सिंह, थॉमस पैट्रिक, साइमन पैट्रिक, मुकुल, रंजन, बबीता राज, राजकिशोर,सैकड़ों महिलाएं, पुरुष तथा बच्चे थे।
जय भारत, जय संविधान, जयहिंद












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