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जरा याद करो कुर्बानी संगोष्ठी आयोजित, जो अपने बुजुर्गों व देश को भूल जाता है,वह नष्ट हो जाता है – इतिहासकार प्रो. (डा.)विघनेश त्यागी , भाजपा प्रवक्ता अवनीश त्यागी

जरा याद करो कुर्बानी संगोष्ठी आयोजित, जो अपने बुजुर्गों व देश को भूल जाता है,वह नष्ट हो जाता है – इतिहासकार प्रो. (डा.)विघनेश त्यागी

हापुड़।
नगर में अतरपुरा चौपालें स्थित 11 अगस्त 1942 को हुए शहीदों की याद में इंद्रप्रस्थ कालेज में जरा याद करो कुर्बानी विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता व चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डा.)विघनेश त्यागी ने कहा कि हमें बड़ी मुश्किल से आजादी मिली है। इतिहास गर्व करने का वह सोपान है, जो विकास की भव्यता के साये में गौरव के साथ आगे बढ़ने को हमें प्रेरित करता है। जो अपने बुजुर्गों व देश को भूल जाते हैं,वो नष्ट हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि कहा कि 11 अगस्त का दिन हापुड़ को इतिहास में अमरत्व प्रदान कर गया। यह वहीं
दिन था, जब 1942 में हापुड़ के पंडित अंगनलाल शर्मा, गिरधारी लाल ठठेरे, मांगे लाल वैश्य, रामस्वरूप व एक महिला ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनकी स्मृति में बनाया गया शहीद स्तंभअब लोगों को दिखता भी नहीं है। ऐसे देशभक्तों की याद में भव्य स्तंभव पार्क बनाया जाना चाहिए।

आरएसएस के प्रचार प्रमुख पदम कुमार ने कहा कि हम सभी को स्मृतियों और भावनाओं में इतिहास को जीवित रखना है। इसी भाव से आने वाली पीढ़ी को सौंपना है।



भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने कहा कि पांच लोगों का एक साथ बलिदान होना, वह भी चौराहे पर, लोगों की रुह तक को कंपा देता है। ऐसा ही अंग्रेजों ने सोचा था। वह तब दंग रह गए, जब इस बलिदान के बाद युवाओं का खून और हिलोरे मारने लगा। यह हमारे लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है।



1942 शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष सुरेश चंद्र संपादक ने कहा कि दिल्ली के नजदीक होने के कारण हापुड़ क्रान्तिकारियों की शरणास्थली रहा है‌। जिलें के सैकड़ों लोगों ने आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों को न्यौछावर किया था,तब हमें आजादी मिली है। डीएम के सहयोग से यहां भव्य शहीद स्मारक बनाया जायेगा।



समाजसेवी डॉ विपिन्न गुप्ता ने कहा कि 11 अगस्त 1942 को हापुड़ में देश की आजादी के लिए चार लोगों ने अपने प्राण की कुर्बानी दी। हामरे शहीदों ने एक संप्रभु, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष व समाजवादी भारत के निर्माण के लिए शहादत थी। देश में आजादी अहिंसा से नहीं बल्कि लाखों देशवासियों की शहादत से हमें आजादी मिली।



समिति के सचिव आशुतोष आजाद ने कहा कि
आज का दिन इन शहीदों को याद करने के साथ-साथ संकल्प लेने का भी है. उन शहीदों के बलिदान का नतीजा है कि आज हम आजाद हैं। देश में लोकतंत्र बहाल हुआ है और संविधान में हमें मौलिक अधिकार मिला। आज उनके अधूरे सपनों को पूरा करने की जरूरत है।



डाक्टर विभिन्न गुप्ता ने कहा कि हापुड़ के लोगों का भी देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस मौके पर शहीद के परिजनों को भी सम्मानित किया गया।



इस अवसर पर आरएसएस के पंकज त्यागी, उमेश राणा, विजय त्यागी, गौरव रुड़कीवाल, आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।





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