साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच – मुनीष प्रताप सिंह

साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच – मुनीष प्रताप सिंह
हापुड़ । इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) धीरखेड़ा, हापुड़ चैप्टर द्वारा मंगलवार को सोसायटी भवन, धीरखेड़ा में चैप्टर चेयरमैन श्री पवन शर्मा की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण मंथन बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का मुख्य विषय वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध एवं उनसे बचाव के उपाय रहा।
बैठक में साइबर क्राइम थाना हापुड़ के थानाध्यक्ष श्री मुनीष प्रताप सिंह अपनी टीम के साथ विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ एसआई सचिन कुमार, साइबर एक्सपर्ट दीपक कुमार तथा एसआई शालिनी सिंह भी मौजूद रहे। साइबर विशेषज्ञों ने उपस्थित उद्यमियों को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए-नए तरीकों की विस्तृत जानकारी देते हुए उनसे सतर्क रहने का आह्वान किया।
थानाध्यक्ष मुनीष प्रताप सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी स्वयं को बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, सरकारी विभाग के कर्मचारी अथवा अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को झांसे में लेते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या वीडियो कॉल पर अपनी बैंक डिटेल, आधार नंबर, पैन नंबर, एटीएम पिन, ओटीपी, सीवीवी या अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। इसके अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल फोन में कोई APK फाइल या अन्य एप्लीकेशन डाउनलोड न करें, क्योंकि इनके माध्यम से साइबर अपराधी मोबाइल और बैंक खातों तक पहुंच बना लेते हैं।
उन्होंने उपस्थित उद्यमियों को इनकमिंग कॉल के पैटर्न, कॉल करने वालों के बातचीत करने के तरीके, दबाव बनाने एवं डराने-धमकाने की रणनीतियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को किसी सरकारी विभाग का वरिष्ठ अधिकारी बताकर तत्काल कार्रवाई, गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की धमकी देता है, तो उसकी बातों में आने के बजाय पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें।
बैठक के दौरान वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” के मामलों पर विशेष चर्चा हुई। मुनीष प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी व्यवस्था या धारा मौजूद नहीं है। पुलिस, साइबर क्राइम विभाग अथवा कोई भी सरकारी अधिकारी किसी नागरिक को वीडियो कॉल या ऑनलाइन माध्यम से डिजिटल अरेस्ट नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लोगों में कानून की जानकारी के अभाव का लाभ उठाकर उन्हें भयभीत करते हैं और लाखों रुपये की ठगी कर लेते हैं।
उन्होंने सभी उद्यमियों से अपील की कि यदि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी, संदिग्ध कॉल, ऑनलाइन फ्रॉड या डिजिटल अरेस्ट जैसी घटना सामने आए तो बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं तथा निकटतम साइबर क्राइम थाने से संपर्क करें। समय पर शिकायत दर्ज कराने से साइबर ठगी की राशि वापस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
चैप्टर चेयरमैन श्री पवन शर्मा ने साइबर क्राइम थाना हापुड़ की पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा प्रत्येक नागरिक और उद्योग के लिए अत्यंत आवश्यक विषय बन चुका है। उन्होंने सभी उद्यमियों से आग्रह किया कि बैठक में प्राप्त महत्वपूर्ण जानकारियों को अपने परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों तथा फैक्ट्री में कार्यरत कर्मचारियों तक अवश्य पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।
बैठक में चैप्टर सचिव लवलीन गुप्ता, कोषाध्यक्ष सौरभ अग्रवाल, सीईसी सदस्य शांतनु सिंहल, राष्ट्रीय सचिव विजय शंकर शर्मा, धीरज चुग , दिनेश अग्रवाल, विजेंद्र कुमार, प्रशांत शर्मा, आकाश शर्मा, शोभित गोयल, अक्षत अग्रवाल, आयुष गर्ग, तन्मय मित्तल, वैभव गुप्ता, पंकज शर्मा सहित बड़ी संख्या में उद्यमी सदस्य उपस्थित रहे। सभी उपस्थित सदस्यों ने साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी को अत्यंत उपयोगी बताते हुए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।











