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देश पर प्राण न्यौछावर करने वाले वलिदानियों की आत्मा के लिए होता है सामूहिक श्राद्ध एवं तर्पण

कार्यक्रम – भाजपा प्रवक्ता अवनीश त्यागी , अब मोबाइल से भी आरटीआइ का आवेदन कर सकते है – सूचना आयुक्त

हापुड़। मेरठ रोड स्थित ग्राम असौड़ा में तिरंगा चौक पर राष्ट्र व सनातन के लिए बलिदान होने वाले ज्ञात-अज्ञात हुतात्माओं की शांति के लिए आयोजित सामूहिक श्राद्ध एवं तर्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

श्री संकट हारी महादेव मंदिर के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने अपने भाव-पुष्प अर्पित किए।

कार्यक्रम में राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र सिंह ने कहा कि
ऐसे आयोजन वास्तव में प्रेरणा दायक है,हमें भी ऐसे कार्यक्रमों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने बताया कि अपनों का श्राद्ध
सभी परिवारों में मनाया जाता है। देश को आजाद कराने में असंख्य बलिदानियों ने अपने प्राणों की आहूति
दी थी। उनके बलिदान के बल पर ही हम आजाद हुवा में सांस ले पा रहे हैं। हम अपने घरों पर श्राद्ध व नवरात्र सहित
सभी त्यौहार केवल इसलिए मना पा रहे हैं, कि अपना रक्त बहाकर देश के जवानों ने अपना बलिदान दिया था। इनमें बहुत से जवान तो ऐसे थे, जिनके परिवारों में भी कोई शेष नहीं बचा। जिनमें से ज्यादातर के बारे में किसी को जानकारी तक नहीं है कि उनका बलिदान कब हुआ था।



राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ सूचना का अधिकार प्रभावी हथियार बना है। कई बड़े घोटाले और घपले आरटीआई से खुले हैं। आज व्यक्ति ग्राम पंचायत से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालयतक ‘की जानकारी के लिए आरटीआइ कारगर साबित हो रही हैं। अब आरटीआइ के लिए आवेदन के लिए लखनऊ आने की भी जरूरत है। कोई भी व्यक्ति अपने मोवाइल से ही आरटीआइ का आवेदन कर सकता है। वह फीस भी आनलाइन
जमा कर सकता है।



उन्होंने कहा कि देश के कई बड़े चर्चित घोटालों का पर्दाफाश आरटीआइ से ही हुआ है। महाराष्ट्र का आदर्श सोसायटी घोटाला एक आरटीआइ से ही सामने आया था, जिसमें मुख्यमंत्री को भी इस्तीफा देना पड़ा था। दिल्ली का कामन वेल्थ घोटाला और
टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाला आरटीआइ से ही सामने आए हैं। अभी हाल ही झांसी में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा एक सेवानिवृत कर्मचारी को पेंशन और अन्य देय आरटीआइ से ही मिल सके हैं। बरेली नगर निगम द्वारा एक फौजी की ससुराल का मकान फर्जीवाड़ा करके माफियाओं को दे दिया गया था। आरटीआइ डालकर जब उस मकान के स्थानांतरण में प्रयुक्त कागजात की जानकारी मांगी गई, तब कहीं जाकर फर्जीवाड़ा सामने आया और फौजी के परिजनों को मकान मिल सका। ऐसे कई उदाहरण हैं।













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