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श्रीमद्भागवत कथा तीसरा दिन:जब माता कुंती ने श्रीकृष्ण से मांगा दुःख – डॉ शैल बिहारी दास

श्रीमद्भागवत कथा तीसरा दिन:जब माता कुंती ने श्रीकृष्ण से मांगा दुःख – डॉ शैल बिहारी दास

, हापुड़।

नगर के जवाह गंज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास डॉ.शैलबिहारी दास ने बताया कि युद्ध समाप्ति के बाद श्रीकृष्ण ने माता कुंती से कुछ मांगने पर उन्होंने दुःख मांग, ताकि हमेशा उनका स्मरण होता रहे।

कथा व्यास डा शैल बिहारी ने बताया कि महाभारत युद्ध समाप्ति के बाद भगवान श्रीकृष्ण एक-एक कर अपने सभी स्नेहीजनों से मिल रहे थे। सबसे मिलकर उन्हें कुछ ना कुछ उपहार देकर श्रीकृष्ण ने विदा ली। अंत में वे पांडवों की माता और अपनी बुआ कुंती से मिले।

भगवान ने कुंती से कहा कि बुआ आपने आज तक अपने लिए मुझसे कुछ नहीं मांगा। आज कुछ मांग लीजिए। मैं आपको कुछ देना चाहता हूं। कुंती की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने रोते हुए कहा कि हे श्रीकृष्ण अगर कुछ देना ही चाहते हो तो मुझे दु:ख दे दो। मैं बहुत सारा दु:ख चाहती हूं। श्रीकृष्ण आश्चर्य में पड़ गए।



श्रीकृष्ण ने पूछा कि ऐसा क्यों बुआ, तुम्हें दु:ख ही क्यों चाहिए। कुंती ने जवाब दिया कि जब जीवन में दु:ख रहता है तो तुम्हारा स्मरण भी रहता है। हर घड़ी तुम याद आते हो। सुख में तो यदा-कदा ही तुम्हारी याद आती है। तुम याद आओगे तो में तुम्हारी पूजा और प्रार्थना भी कर सकूंगी।



उन्होंने कहा कि मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत सुनकर ही होता है। विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं।



कथा व्यास ने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि भागवत बताता है कि कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो वहीं सच्ची भक्ति है।



श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने से जीव को मुक्ति मिल जाती है। जो हमेशा पापकर्म में लगा रहता है। हमेशा दुराचार करता है। क्रोध में जलता रहता है। कुटील कामी और दंभी होता है। माता-पिता की सेवा नहीं करता है। कलिकाल में मुक्ति के लिए ऐसे जीव श्रीमद्भागवत की कथा सुनने से पवित्र हो जाते हैं।



इस मौके पर गौशाला के प्रधान सुरेश ठेकेदार, अंकित गुप्ता,
डॉ.राकेश अग्रवाल, विशाल अग्रवाल, मनोज कर्णवाल, विकास गोयल , डॉ सुमन अग्रवाल, यर्थाथ अग्रवाल, भावना अग्रवाल, चन्द्र प्रकाश ठठेरे, पूनम कर्णवाल, शान्तुन सिंघल,राहुल सिंघल, संजीव रस्तोगी, बिट्टू वर्मा आदि मौजूद थे।







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