टीईटी से पहले नियुक्त शिक्षकों पर अनिवार्यता थोपना गलत, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने पीएम-सीएम को भेजा ज्ञापन

टीईटी से पहले नियुक्त शिक्षकों पर अनिवार्यता थोपना गलत, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने पीएम-सीएम को भेजा ज्ञापन
जिलाध्यक्ष अशोक कश्यप के नेतृत्व में डीएम के माध्यम से भेजा ज्ञापन, आरटीई एक्ट में संशोधन की मांग; 20 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित

हापुड़। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के बैनर तले शिक्षकों ने कक्षा 8 तक पढ़ाने वाले पुराने शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपने का विरोध किया। जिलाध्यक्ष अशोक कश्यप के नेतृत्व में शिक्षकों ने शनिवार को जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों का मामला
कार्यकारी जिलाध्यक्ष विजय कुमार त्यागी ने बताया कि एनसीटीई की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 और उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पहले से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी थोपना नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन है। इससे देशभर के 20 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
आरटीई एक्ट में संशोधन की मांग
ज्ञापन में कहा गया कि पुराने शिक्षक नियुक्ति के समय के प्रावधानों के अनुसार पात्र थे। अब उन पर नई शर्त थोपना अन्याय है। संगठन ने सरकार से शिक्षकों की गौरव गरिमा, मान सम्मान और सेवा सुरक्षा के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम में आवश्यक संशोधन करने की मांग की। शिक्षकों के लंबे अनुभव और उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए सरकार से संवेदनशीलता बरतने की अपील की गई।
इस मौके पर संजय सक्सेना, मोहर सिंह, अरुण सिसोदिया, आदर्श गोयल, रवि भूषण, रीता भाटी, ज्योति चौधरी, सोनू, प्रवेश, दिनेश, मनोज पाल, बृजपाल, अजय कुमार, कपिल, दीपक, नवीन, सविता सारंग, हरेंद्र पाल, अनंगपाल, सुनील कुमार, रीतू अग्रवाल, सुमनलता, हेमलता, फजलुर्रहमान, अकील, आस मोहम्मद, इस्माइल, हर्षवर्धन, मदनलाल, ऊषा शर्मा, विनोद, सुरेंद्र, श्याम मुरारी, सुशील, रामकिशोर, सरजीत, कैलाश चंद समेत बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।











