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भक्ति के रंग में रंगा पंडाल: धूमधाम से मनाया गया भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह उत्सव

भक्ति के रंग में रंगा पंडाल: धूमधाम से मनाया गया भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह उत्सव

हापुड़। श्री मां मनसा देवी मन्दिर प्रांगण में मंदिर जीणोद्धार के 16वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य राजीव कृष्ण भारद्वाज ने जब भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया, तो पूरा पंडाल मंगल गीतों और जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान फूलों की वर्षा की गई और श्रद्धालुओं ने भगवान के विवाह में बाराती बनकर जमकर नृत्य किया।
कंस वध और अधर्म का अंत
कथा में महाराज जी ने श्रीकृष्ण के मथुरा गमन और ‘कंस वध’ का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान ने अत्याचारी कंस का अंत कर अपने माता-पिता देवकी और वसुदेव को कारागार से मुक्त कराया। इसके बाद उग्रसेन को मथुरा का राजा बनाया गया। व्यास जी ने संदेश दिया कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत सत्य और धर्म की ही होती है।
उद्धव-गोपी संवाद और भक्ति का मर्म
कथा में ‘उद्धव-गोपी संवाद’ के माध्यम से ज्ञान और भक्ति के अंतर को समझाया गया। व्यास पीठ से कहा गया कि भगवान केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि प्रेम और अनन्य भक्ति से प्राप्त होते हैं। गोपियों का कृष्ण के प्रति निस्वार्थ प्रेम सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
रुक्मिणी मंगल: जीव और ब्रह्म का मिलन
महाराज जी ने बताया कि माता रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप हैं और उनका विवाह जीव का परमात्मा से मिलन का प्रतीक है। भगवान कृष्ण ने किस प्रकार रुक्मिणी जी के प्रेम पत्र का मान रखते हुए उन्हें अपनाया,
“रुक्मिणी जी ने भगवान को पाने के लिए तप और प्रार्थना का मार्ग चुना। आज के युवाओं को भी अपने जीवन में संयम और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास रखना चाहिए। गृहस्थ जीवन में यदि भक्ति का समावेश हो जाए, तो वह स्वर्ग के समान बन जाता है।”
इस प्रसंग ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
विवाह की रस्में और उत्सव
कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी निकाली गई। श्रद्धालुओं ने बाराती बनकर नृत्य किया और मंगल गीत गाए। भगवान को सुंदर पोशाक और आभूषणों से सजाया गया। सभी भक्तों को विवाह का विशेष प्रसाद (मिठाइयां और फल) वितरित किया गया। इस दौरान मंदिर प्रांगण को फूलों व लाइटों, गुब्बारों से भव्यता सजाया गया
*कथावाचक राजीव कृष्ण भारद्वाज* ने अपने प्रवचन संदेश में कहा “कथा केवल मनोरंजन नहीं जीवन का सार है यह हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला उज्जवल भविष्य है”
कथा उत्सव मैं गोवर्धन महाराज की पूजा-अर्चना प्रबंधक शिवकुमार मित्तल रितु मित्तल ने गोवर्धन महाराज का दुग्ध अभिषेक द्वारा किया और मिष्ठान, फल, नमकीन छप्पन प्रकार के भोग लगाएं ।
मिडिया प्रभारी महेश तोमर ने बताया कल सप्तम दिवस को सुबह मूर्ति पूजा , रूद्राभिषेक दोपहर 2: बजें से कथा प्रसंग में सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष,व्यास पूजन व कथा विश्राम मुख्य यजमान राकेश माहेश्वरी विनीता महेश्वरी, वसंत लाल महेश्वरी वृंदा महेश्वरी ने श्रीमद्भागवत आरती की
इस अवसर पर प्रबंधक शिवकुमार मित्तल, महेश तोमर, बिजेंद्र कंसल, अनुज मित्तल, खिलैन्द्र सैनी, मधुसूदन गोयल, लाल राज किशोर, सुरेश चंद्र गुप्ता, मोनू प्रजापति, रितू मित्तल, अंशिका गोयल, कविता कंसल, अंजलि सैनी, निता स्वामी, पंखिल मित्तल, गीता गुप्ता, हरदेई शर्मा, स्वाति गुप्ता, रिंकी शर्मा, नैना गुप्ता, दीपांशी सैनी, हिमानी गुप्ता, अंजली गुप्ता, सोमिल गुप्ता, रीमा गुप्ता, सोनू सैनी, दिनेश गुप्ता, दीपांश मित्तल, पराग कंसल, कालीचरण सैनी, शुभम गुप्ता, जितेंद्र शर्मा साउंड वाले, अंशुल सिंघल, बृजभूषण अग्रवाल, दयाराम सैनी, सक्षम गुप्ता, आनंद स्वामी, अजय गुप्ता, रामभुवन आदि का सहयोग रहा



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