देवर्षि नारद जयंती व पत्रकारिता दिवस मनाया, न्यूज में लोकहित व समाजहित होता है:मनोज सिसौदिया

देवर्षि नारद जयंती व पत्रकारिता दिवस मनाया, न्यूज में लोकहित व समाजहित होता है:मनोज सिसौदिया
-देवर्षि नारद की छवि फिल्मकारों ने धूमिल की:सुरेन्द्र सिंह
-हिन्दी पत्रकारिता दिवस की नींव 30 मई 1820 को रखी गयी थी
-देश में विभिन्न स्थानों पर 40 विश्व संवाद केन्द्र संचालित है
-हिन्दी पत्रकारिता का आदर्श देवर्षि नारद है
हापुड़।
रेलवे रोड स्थित रॉयल पैलेस में शुक्रवार को विश्व संवाद केंद्र के तत्वावधान में देवर्षि नारद जयंती व पत्रकारिता दिवस मनाया गया। जिसमें हिन्दी पत्रकारिता से संबंधित विषय व देवर्षि नारद की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में विश्व संवाद केन्द्र के मेरठ मंडल प्रभारी सुरेन्द्र सिंह ने देवर्षि नारद मुनि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवर्षि नारद वाकपटुता के साथ-साथ सम्पूर्ण विषयों का पूरा-पूरा ज्ञान था,किंतु हमारे फिल्मकारों ने उनकी छवि खराब करने की कोशिश की। देवर्षि जहां भी पहुंचते थे,वहीं पर उनका सम्मान होता था। अगर भगवान कृष्ण उनके सामने अपना सिंहासन छोडक़र खड़े हो जाते थे,वहीं कंस नामक कू्रर शासक भी उन्हें देखकर अपना सिंहासन छोड़ देते थे,क्योंकि अगर नारद उपस्थित हुए हैं तो जरूर उनके लिए अच्छा मैसेज लाए होगें। महाभारत में देवर्षि धर्मराज युधिष्ठर के पास जाते है तो महर्षि व्यास इतने गर्वीले स्वर में उनका परिचय कराते हैं वहां मौजूद हर व्यक्ति दंग रह जाता है। उनका सम्मान तीनों लोकों में होता था। वो संवाद का युग था इसलिए देवर्षि उस समय के संवाददाता थे।
उन्होंने कहा कि सहीं मायने में तो पत्रकारिता दिवस की नींव 30 मई 1820 में रखी गई थी। पंडित जुगल किशोर ने उगता हुआ सूज पश्चिम बंगाल से अपना साप्ताहिक समाचार पत्र निकाला था,हालांकि एक वर्ष बाद उगता हुआ सूरज अस्त हो गया। उसके बाद पत्रकारिता के कदम निरंतर आगे बढऩे लगे। माखनलाल चतुर्वेदी हों या बाल गंगाधर तिलक,लाला लाजपतराय,स्वामी विवेकानंद,स्वामी दयानंद सरस्वती,हनुमान प्रसाद,महर्षि अरविन्द,महात्मा गांधी,सावरकर,श्रद्धानंद,सरदार भगत सिंह,सुभाषचंद बोस,लाला हरदयाल,गणेश शंकर विद्यार्थी,भीमराव अम्बेडकर,मदनमोहन मालवीय, दीनदयाल उपाध्याय,रामधारी सिंह दिनकर व हजारी प्रसाद द्विवेदी का नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में सर्वोपरि रहा है। पत्रकारिता का आदर्श देवर्षि नारद है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि व जी.एस मेडिकल कालेज के डायरेक्टर मनोज सिंह सिसौदिया ने कहा कि वर्तमान युग में मीडिया के क्षेत्र में विज्ञप्ति मांगने का चलन ज्यादा हो गया है,,जिससे न्यूज का भाव कम हो जाता है। न्यूज का सत्यापन जरूर होना चाहिए,अन्यथा न्यूज भ्रामक लगती है,और असर उसका होना चाहिए,वह नहीं हो पाता। अगर हम किसी कार्यक्रम में जा रहे है तो वहां कुछ समय जरूर दें,न्यूज की भूमिका को अपने दिमाग में गहराई से बैठा सकें। न्यूज में ही लोकहित,देशहित और समाज हित समाहित होता है। समाज सुधार के लिए समाचार पत्र बहुत बड़ा माध्यम है। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन उत्तम सिंह ने किया।











