ज्येष्ठ वट अमावस्या पर तीन लाख श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी,सुहाग की रक्षा और दीर्घायु के लिए की वट वृक्ष की पूजा

ज्येष्ठ वट अमावस्या पर तीन लाख श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी,सुहाग की रक्षा और दीर्घायु के लिए की वट वृक्ष की पूजा
हापुड़ (यर्थाथ अग्रवाल मुन्ना)।
ज्येष्ठ वट अमावस्या पर शनिवार को गंगा स्नान करने के लिए दिल्ली, हरियाणा, समेत पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई जनपदों से लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर पूजा अर्चना की। वहीं, सावित्री वट अमावस्या पर सुहागिन महिलाओं द्वारा व्रत रखकर पति की दीर्घायु के लिए वट वृक्ष की पूजा अर्चना की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं नें वट वृक्ष की पूजा अर्चना की एवं पत्ति की दीर्घायु के लिए कामना की।
जानकारी के अनुसार ज्येष्ठ
वट अमावस्या पर महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा और दीर्घायु के लिए गंगा स्नान के बाद वट वृक्ष की पूजा करती हैं। विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु शुक्रवार की शाम से ही आना शुरू हो गए थे।ब्रजघाट आकर लगभग लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान किया और शनिवार सुबह से श्रद्धालुओं की वापसी शुरू हो गई। गंगा किनारे बैठे पंडितों से भगवान सत्यनारायण की कथा सुन मंदिरों में अपने इष्ट देवों के दर्शन किए और अपनी मनोकामना मांगी। गंगा स्नान को आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तपिश भरी गर्मी में शीतल पेयजल के लिए प्याऊ और भंडारे का आयोजन किया गया।
उल्लेखनीय है कि
वट सावित्री व्रत की महिमा अपार हैं। महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए इस दिन व्रत करती हैं। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वट अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन सावित्री यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लेकर आई थी और उसी दिन से इस व्रत को किया जाने लगा। वट सावित्री व्रत विवाहित औरतों द्वारा किया जाता है। वट का मतलब बरगद का पेड़ है, जिसमे तीन देवताओं का वास होता है। जड़ में स्वयं ब्रह्मा रहते हैं, बीच में विष्णु विराजमान होते हैं और सबसे ऊपर शिव का राज होता है और बाकी लटकती हुई डालियों को स्वयं सती का रूप माना गया है। इसीलिए इस वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा की जाती है। जिससे सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।











