फर्जी नाम से शिकायत करने का मामला: पूर्व में बर्खास्त संविदाकर्मी विशाल गहलोत फिर विवादों में घिरा

हापुड़,।
जनपद हापुड़ में आईजीआरएस पोर्टल पर सीए हर्ष अग्रवाल के नाम से फर्जी शिकायत दर्ज करने के मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस फर्जी शिकायत के पीछे वही व्यक्ति निकला जो पहले से ही विवादों में रहा है – विशाल गहलोत, जो पूर्व में हापुड़ के बेसिक शिक्षा विभाग में संविदाकर्मी था और जिसे जिलाधिकारी द्वारा सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि विशाल गहलोत ने अपने भाई नवीन कुमार के मोबाइल नंबर 9456007544 का उपयोग कर यह शिकायत की, जिसमें शिक्षा विभाग के एक प्रधानाध्यापक पर वित्तीय अनियमितताओं का झूठा आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता के तौर पर सीए हर्ष अग्रवाल का नाम, पता और पहचान गलत तरीके से इस्तेमाल की गई।
जब असली हर्ष अग्रवाल को इस फर्जी शिकायत की जानकारी हुई, तो उन्होंने इसे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाला गंभीर अपराध बताया और संबंधित अधिकारियों से विधिक कार्रवाई की मांग की।
पृष्ठभूमि में गंभीर आरोप:
विशाल गहलोत पूर्व में हापुड़ बेसिक शिक्षा विभाग में संविदा पर नियुक्त था।
जिलाधिकारी श्री अभिषेक पांडेय द्वारा उसे “गलत नियुक्ति” (फर्जी प्रक्रिया) के आधार पर सेवा से बर्खास्त किया गया था।
इसके बावजूद, वह शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों में सक्रिय बना रहा और अब एक बार फिर ऐसे दुर्भावनापूर्ण कृत्य में संलिप्त पाया गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार:
जांच अधिकारी क्षेत्राधिकारी गढ़मुक्तेश्वर वरुण मिश्रा द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि शिकायत में प्रयुक्त मोबाइल नंबर विशाल गहलोत के भाई के नाम पर है, लेकिन स्वयं विशाल ने इसका दुरुपयोग किया।
थाना साइबर सेल, हापुड़ द्वारा दोनों भाइयों को बुलाया गया था, जहां इन्होंने अपनी गलती स्वीकार की और माफी मांगी, परंतु सीए हर्ष अग्रवाल माफी को अस्वीकार करते हुए कानूनी कार्यवाही पर अड़े रहे।
अब मामला पहुंचा एंटी फ्रॉड सेल तक:
यह संपूर्ण मामला अब एंटी फ्रॉड सेल, हापुड़ को भेज दिया गया है, जहां से आगे की विधिक कार्रवाई तय की जाएगी।
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प्रशासन के लिए बड़े सवाल:
एक बार सेवा से बर्खास्त हो चुका संविदाकर्मी कैसे अब भी विभागीय गतिविधियों में सक्रिय है?
क्या नाम और पहचान का ऐसा दुरुपयोग सिर्फ माफी मांगकर समाप्त हो सकता है?
सीए हर्ष अग्रवाल ने दोहराया है कि वह इस मामले में किसी भी प्रकार की रियायत नहीं चाहते और दोषियों को कानूनी सजा दिलवाना उनका स्पष्ट उद्देश्य है।












