जेएमएम इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर्स ने समाज कल्याण में साहित्य के योगदान पर गहनता से चर्चा की संग्रोष्ठी आयोजित-

दो दिवसीय संगोष्ठी में प्रोफेसर्स ने समाज कल्याण में साहित्य के योगदान पर गहनता से चर्चा की –
स्थानीय – जे०एम०एस० ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, हापुड़ में “मानव कल्याण हेतु साहित्य का योगदान” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन एसोसिएशन फॉर इंग्लिश स्टडीज ऑफ़ इंडिया (ए०ई०एस०आई०) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें देश भर के विभिन्न प्रदेशों के विश्वविद्यालयों से आए प्रोफेसर्स ने मानव कल्याण हेतु साहित्य का योगदान सहित राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर खुलकर अपने विचार प्रकट किये।
बतौर मुख्य वक्ता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ० कुलदीप सिंह ने अपने व्याख्यान में कहा कि महाकाव्य, लोककथाएँ और आधुनिक साहित्य सभी समाज को एक साझा सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ते हैं। भाषा के जरिए हम अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं और साहित्य के जरिए समाज में संवेदनशीलता, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों का संचार करते हैं।
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की प्रोफेसर मीनू कश्यप ने साहित्य पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज को दिशा देने वाला दर्पण भी है। साहित्य के माध्यम से हम जीवन के विविध अनुभवों, संघर्षों और मूल्यों को अभिव्यक्त करते हैं।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी की प्रो० निशा सिंह ने साहित्य पर बोलते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बहुभाषिकता और भारतीय ज्ञान परंपरा को महत्व दिया गया है और साहित्य इन दोनों को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। शिक्षा और साहित्य का संगम ही वह आधार है जो विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनाता है और समाज में समरसता तथा मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करता है।
आई०आई०एम०टी० विश्वविद्यालय, मेरठ में अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ० प्रकाश बहादुरी ने कहा कि साहित्य व्यक्ति को आत्मचिंतन की ओर ले जाता है और उसे जीवन की जटिलताओं को समझने तथा उनसे निपटने की शक्ति प्रदान करता है। साहित्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी साधन है।
प्रसिद्ध उपन्यासकार व महामंत्री ए०ई०एस०आई० प्रो० विकास शर्मा ने कहा कि साहित्य में वह ताकत होती है जो समाज की सोच को बदलने और लोगों को सही दिशा देने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि अच्छा साहित्यकार, प्रोफेसर और विद्यार्थी किसी राजनीतिक पार्टी का व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज और मानवता के हित में स्वतंत्र सोच रखने वाला व्यक्ति होता है। उसका कार्य ज्ञान, विचार और सच्चाई के माध्यम से समाज को जागरूक बनाना तथा लोगों को सकारात्मक मार्ग दिखाना होता है।
नागपुर के प्रोफेसर प्रो० सुदेश एम० बी० भोवते ने कहा कि आधुनिक काल में साहित्य ने सामाजिक सुधार, स्वतंत्रता, शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा दिया। लेखकों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज की समस्याओं को उजागर किया और लोगों को परिवर्तन के लिए प्रेरित किया।
जे०एम०एस० ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स के फाउंडर चेयरमैन एवं संगोष्ठी के संरक्षक राकेश सिंघल ने सभी अतिथियों का स्वागत व शुभाशीष देते हुए कहा कि ऐसी शैक्षणिक संगोष्ठियाँ ज्ञान के आदान-प्रदान का सशक्त मंच प्रदान करती हैं और विद्यार्थियों को साहित्य, संस्कृति तथा मानवीय मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
के०आई०ई०टी०, गाजियाबाद के प्रोफेसर विपिन त्यागी ने भाषा विज्ञानं व् साहित्य के सम्बन्धों पर विस्तृत चर्चा की।
ए०ई०एस०आई० के चेयरमैन व जे०एम०एस० ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स के महानिदेशक प्रो० सुभाष गौतम ने कहा कि अंग्रेजी साहित्य एक व्यापक और समृद्ध परंपरा है, जिसमें मध्यकालीन युग से लेकर उत्तर-आधुनिक समय तक मानव जीवन, समाज, राजनीति, संस्कृति और विचारधाराओं का गहन चित्रण मिलता है। चौसर, शेक्सपीयर, मिल्टन, वर्ड्सवर्थ, एलियट और समकालीन लेखकों तक की रचनाओं ने न केवल भाषा को समृद्ध किया है बल्कि विश्वभर के पाठकों को नए दृष्टिकोण भी प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समझने, प्रश्न करने और बेहतर समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करता है।
संगोष्ठी के सांयकालीन के तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ० बबीता त्यागी (एसोसिएट प्रोफेसर, के०आई०ई०टी० यूनिवर्सिटी, दिल्ली-एनसीआर), डॉ० पूनम शर्मा (एसोसिएट प्रोफेसर, एस०ओ०ए०एच०), आई०आई०एम०टी० यूनिवर्सिटी मेरठ), डॉ० विपिन कुमार (एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ इंग्लिश, के०आई०ई०टी०, गाजियाबाद) , डॉ० बीना (एसोसिएट प्रोफेसर और एच०ओ०डी०, स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज, एमएसबी कॉलेज मेरठ), डॉ०. प्रकाश भादुड़ी (प्रोफेसर ऑफ इंग्लिश, आई०आई०एम०टी० यूनिवर्सिटी, मेरठ), डॉ० वंदना शर्मा (असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश, जे.के.पी.पी.जी. कॉलेज, मुजफ्फरनगर) द्वारा की गई।
जे०एम०एस० ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स के फाउंडर चेयरमैन एवं संगोष्ठी के संरक्षक राकेश सिंघल तथा मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ० आयुष सिंघल ने अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि देश के कोने कोने से विद्वानों ने आकर जे०एम०एस० ग्रुप के अकादमिक में चार चाँद लगा दिए हैं। संस्थान के फाउंडर चेयरमैन राकेश सिंघल ने अध्यक्षता करते हुए सभी अतिथियों का मान बढ़ाया।
संगोष्ठी के वैलेडिक्टरी सेशन में मुख्य अतिथियों द्वारा संगोष्ठी के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की गई। इस अवसर पर विभिन्न तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत उत्कृष्ट शोधपत्रों की सराहना की गई तथा प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। समापन भाषण में साहित्य के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का सफल संचालन चौ० चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की शोधार्थी रिया देशवाल ने किया।












