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विश्व आर्द्र भूमि दिवस पर हुई परिचर्चा,जल प्लावित भूभाग जैसे- पोखर झील, झरने, दलदली भूमि बा आदि आर्द्रभूमि के अन्तर्गत आते है- डॉ.राकेश अग्रवाल

हापुड़़ (अमित अग्रवाल मुन्ना)।

हापुड़़ के अच्छेजा स्थित एण्टी०एम०एस० कॉलिज में विश्व आर्द्र भूमि दिवस पर प्राणियों के लिए लाभकारी है आर्द्रभूमि विषय पर छात्र और शिक्षकों के बीच परिचर्चा आयोजित की गयी।परिचर्चा प्रारम्भ करते हुए संस्था के कार्यकारी निदेशक डॉ राकेश अग्रवाल ने कहा कि जल प्लावित भूभाग जैसे- पोखर झील, झरने, दलदली भूमि बा आदि आर्द्रभूमि के अन्तर्गत आते है। प्राणियों के जीवन में इनका बड़ा महत्व है। मछली जलमुर्गी, जलचर, जैवविविधता वाले पौधे इनमें जीवन पाते है। पोलीटेक्नीक के कोआर्डीनेटर इजी० विद्युत भद्रा ने बताया कि जल में डूबा आर्द्रभूमि क्षेत्र रामसर कहलाता है भारत में 75 रामसर स्थल है। बी0एड0 के डीन डॉ संजय कुमार ने कहा विश्व में एक अस्थ लोगों की आजीविका आर्द्रभूमि पर निर्भर है।

प्रो० एस० पी० राघव ने बताया कि भारत में सबसे बड़ी आर्द्रभूमि सुन्दरबन बेटलैंड और सबसे छोटी आर्द्रभूमि स्थल रेणुका आर्द्रभूमि स्थल है। डॉ० अमिता शर्मा और प्रो० विनय ने बताया कि उड़ीसा में चिलका झील, राजस्थान में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, लोकतक झील, वूलर झील महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि स्थल है प्रीति, संदीप, आसिफ, स्वीटी, पारूल, नीतू, सोहनवीर ने कहा कि आर्द्रभूमि बाढ़ के प्रभाव को कम करने और प्रदूषित जल को साफ करने में बड़ी भूमिका निभाती है। पुस्तकालयाध्यक्ष नितिन, घनेन्द्र पाल सिंह, बन्दना, पारूल गिरि, नीलम, रीता, स्नेहा, आशीष, काजल चौधरी, प्रभात शिशीदिया, जोगिन्दर राजू सैनी ने सहयोग दिया। रूपम ने भोजपुरी में भारत मां की बन्दना की।





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