“श्रावणी पर्व पर आर्य समाज हापुड़ में देशभक्ति और वैदिक भक्ति का संगम”

“श्रावणी पर्व पर आर्य समाज हापुड़ में देशभक्ति और वैदिक भक्ति का संगम”
हापुड़,
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आर्य समाज प्रांगण, हापुड़ में ध्वजारोहण समारोह बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में देश की आज़ादी के लिए बलिदान देने वाले वीर सपूतों और वीरांगनाओं को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने स्मरण कराया कि भारत की स्वतंत्रता संग्राम में 80 प्रतिशत से अधिक स्वतंत्रता सेनानी, आर्य समाज और महर्षि दयानंद की शिक्षाओं से प्रेरित थे।
श्रावणी पर्व के उपलक्ष्य में आर्य समाज, हापुड़ में पाँच दिवसीय विशेष वैदिक सत्संग का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम 13 अगस्त (बुधवार) से 17 अगस्त (रविवार) तक प्रतिदिन प्रातः 7:00 से 10:00 बजे तथा सायं 5:00 से 7:00 बजे तक आर्य समाज परिसर में आयोजित किया जा रहा है।
आर्य समाज के मंत्री संदीप आर्य ने कहा, “जिस देश में वीरों का अभाव हो जाता है, वह देश अधिक समय तक स्वतंत्र नहीं रह सकता। अतः हमें अपने बालकों को वीर-वीरांगना बनने की शिक्षा देनी चाहिए और राष्ट्र को सर्वोपरी मानने की भावना उनके हृदय में स्थापित करनी चाहिए।”
कार्यक्रम के तीसरे दिन भजनोपदेशक श्री कुलदीप भास्कर (घरौंदा, हरियाणा) ने अपने भक्ति-भाव से ओत-प्रोत भजनों — “ओम् कहने से तू तर जाएगा, तेरा जीवन सुधर जाएगा”, “वह क्या दबदबा था यह राणा, शिव की कटारों से पूछो” और “तारीफ करूं क्या उसकी जिसने हमें जगाया” — से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
आचार्य संजीव रूप जी (बदायूं, उत्तर प्रदेश) ने वैदिक सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “वैदिक सत्संग और वेदों के स्वाध्याय से व्यक्ति की आत्मा में दिव्यता आती है और वह मोक्ष का अधिकारी बन जाता है।”
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध भजनोपदेशिका शुलभा शास्त्री के साथ प्रधान पवन आर्य, माया आर्या, सुरेंद्र गुप्ता, निधि आर्या, शशि सिंघल, रेखा गोयल, माया आर्या आलोक, पुष्पा आर्या, प्रधाना वीना आर्या, रीना आर्या, सोनू आर्या, शीतल आर्या सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।












