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एचडब्ल्यूसी पर लक्षणयुक्त व्यक्तियों की टीबी जांच के मामले में हापुड़ तीसरे नंबर पर

एचडब्ल्यूसी पर लक्षणयुक्त व्यक्तियों की टीबी जांच के मामले में हापुड़ तीसरे नंबर पर
—–अभी ऑनलाइन न करें…..

क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम, जिले में हुआ सौ फीसदी टीबी नोटिफिकेशन
टीपीटी और एचआईवी स्क्रीनिंग भी शत-प्रतिशत
शासन से हुई मार्किंग

हापुड़,
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स (एचडब्ल्यूसी) के जरिए की जा रही लक्षण युक्त व्यक्तियों की टीबी जांच करने के मामले में हापुड़ जिले को सूबे में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। जनवरी से मई-2023 तक की गई टीबी जांच की शासन से रैकिंग की गई है। 100 प्रतिशत जांच करके शामली जनपद पहले नंबर पर और 98 प्रतिशत के साथ संत कबीर नगर दूसरे नंबर पर रहा है। हापुड़ जनपद लक्षण युक्त व्यक्तियों की 89.9 प्रतिशत जांच कर सूबे में तीसरे पायदान पर रहा है।
टीबी से रोकथाम के लिए जनपद में लगातार जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है ताकि टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को जन आंदोलन बनाया जा सके। किसी को भी खांसते हुए देखें तो उसे टीबी के लक्षणों के बारे में बताएं और टीबी जांच के लिए प्रेरित करें। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है और नियमित उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है। डीटीओ डा. राजेश सिंह ने बताया – क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की मार्किंग की बात करें तो जिले को 81.3 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं। यह मार्किंग जिले में हुए शत-प्रतिशत टीबी नोटिफिकेशन, सभी क्षय रोगियों के परिवार के पांच वर्ष तक के बच्चों को दी गई टीबी प्रीवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) क्षय रोगियों की शत-प्रतिशत एचआईवी और शुगर स्क्रीनिंग और डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानि हर माह क्षय रोगियों को दी जाने वाली पांच सौ रुपए की राशि) के आधार पर हुई है।

-डीटीओ का कथन
सभी क्षय रोगियों की एचआईवी और शुगर स्क्रीनिंग की गई है। सौ फीसदी स्क्रीनिंग के साथ इस मामले में कासगंज और गोरखपुर जनपद के बाद हापुड़ तीसरे पायदान पर रहा। जनवरी से मई तक जिले में कुल 1577 सीबीनॉट जांच कर 528 क्षय रोगी और 34 एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी के मरीज खोजे गए हैं।
-डॉ राजेश सिंह, डीटीओ

-सीएमओ का कथन
हर क्षय रोगी की सीबीनॉट जांच करने की गाइडलाइन है, दरअसल यह मशीन जांच के दौरान टीबी होने के लिए जिम्मेदार जीवाणु की फेमिली हिस्ट्री खोजकर रोगी के लिए उपयुक्त उपचार तय करने में भी मदद करती है। डाट्स पद्धति के माध्यम से टीबी के मरीजों का उपचार हो रहा है।
-डॉ सुनील त्यागी, सीएमओ हापुड़-





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