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किशोर स्वास्थ्य मंच का आयोजन: बेहतर किशोरी स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता : सीएमओ

  • विशेषज्ञों ने किशोरियों को स्वास्थ्य और स्वच्छता की बारीकियां बताईं
  • माहवारी को लेकर कोई परेशानी हो तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं

हापुड़ । चंपा बालिका इंटर कॉलेज में सोमवार को “किशोर स्वास्थ्य मंच” का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने इस मौके पर छात्राओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता (हाईजीन) की बारीकियां बताईं। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. सुनील कुमार त्यागी और मुख्य अतिथि धौलाना ब्लॉक प्रमुख निशांत ‌सिसौदिया ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर कॉलेज प्रबंधक शशि सिसौदिया और प्रिंसीपल अमिता सिंह भी मौजूद रहीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डा. सुनील कुमार त्यागी ने बताया उन्होंने कहा किशोरी स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है, क्योकि स्वस्थ किशोरी ही आगे चलकर स्वस्थ परिवार का आधार बनती है। एनीमिया (खून की कमी) का सबसे बड़ा कारण पेट में कीड़े होना है। आप भोजन के रूप में जो पोषण लेते हैं पेट के कीड़े उसे चट कर जाते हैं और शरीर को पोषण न मिलने के कारण शरीर में खून की कमी हो जाती है।

सीएमओ ने बताया शरीर में हीमोग्लोबिन कम से कम 12 ‌मिग्रा अवश्य होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हर छह माह पर दी जाने वाली कीड़े निकालने वाली दवा चिकित्सकीय निर्देशन में खाएं। यह गोली एक से 19 वर्ष तक के बच्चों को दी जाती है। यह गोली कभी भी खाली पेट नहीं खानी है। क्षय रोग विभाग की ओर से जिला पीपीएम कोऑर्डिनेटर सुशील चौधरी के नेतृत्व में स्टॉल लगाकर क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की जानकारी दी गई। टीबीएचवी नंदकिशोर ने क्षय रोग के लक्षणों के बारे में जानकारी दी।

आरबीएसके से डीईआईसी मैनेजर डा. मयंक चौधरी ने बताया- बच्चों और किशोरों को साल में दो बार पेट के कीड़े निकालने की दवा स्वास्थ्य विभाग की ओर से खिलाई जाती है। उन्होंने बताया पेट के कीड़ों से गंभीर संक्रमण हो जाता है। दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी, उल्टी, जी मिचलाना, गुदा मार्ग में खुजली, शरीर का विकसित न होना, भूख कम लगना, खाना खाने का मन नहीं करना, पेट फूलना आदि इसके लक्षण हैं। उन्होंने राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा – यह कार्यक्रम सभी किशोरों को उनके स्वास्थ्य और सेहत के प्रति जागरूक करने के लिए चलाया जाता है। कार्यक्रम के जरिए किशोरों की जरूरत वाली सेवाओं को उन तक पहुंचाना है।

किशोरियों में एनीमिया एक प्रमुख समस्या है, जिसका मूल कारण अल्प पोषण है। किशोरावस्था में निरंतर शारीरिक व मानसिक बदलाव होते हैं। इसलिए किशोरियों को खानपान पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। किशोरियां आंगनबाड़ी केंद्र पर मिलने वाली नीली गोली (आईएफए) हर हफ्ते खाएं। भोजन और गोली के बीच आधे घंटे का अंतराल जरूरी होता है। इस गोली के साथ चाय या कॉफी न लें। कार्यक्रम के माध्यम से किशोरियों को कुपोषण, माहवारी और शारीरिक बदलाव के बारे में जागरूक किया गया। डेंटल हाईजीन एक्सपर्ट पंकज तोमर ने छात्राओं को दांतों की साफ- सफाई के बारे में बताया।



आरबीएसके टीम से डा. मीनाक्षी ने छात्राओं को माहवारी स्वच्छता के बारे में बताते हुए सेनेटरी नेपकिन का प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा किशोरियां शर्म के चलते नेपकिन का बंदोवस्त करने के बजाय कोई भी कपड़ा प्रयोग कर लेती हैं, यह गलत है। नेपकिन का प्रयोग करें और छह से आठ घंटे में नेपकिन को अवश्य बदल लें। उन्होंने कहा सांस फूलना, चक्कर आना, भूख न लगना व माहवारी में परेशानी होना एनीमिया के लक्षण हो सकते हैं। इस तरह की परेशानी होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर अपना परीक्षण कराएं और परामर्श लेकर नीली गोली का सेवन करें। कार्यक्रम में सीएचसी धौलाना से एमओआईसी डा. रोहित मनोहर, डा. शादाब और कुष्ठ रोग विभाग से निसार अहमद मौजूद रहे।
















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