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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा:ब्रह्मज्ञान से ही होगी रामराज्य की परिकल्पना साकार: डॉ. सर्वेश्वर

ब्रह्मज्ञान से ही होगी रामराज्य की परिकल्पना साकार: डॉ. सर्वेश्वर

हापुड़।‌

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अर्जुन नगर के सामने वाला ग्राउंड, स्वर्ग आश्रम रोड, हापुड़ में आयोजित की गई श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस, अर्थात्‌ 23 मई, 2026 को कथा पंडाल में दीपावली पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जिसमें भक्तों ने नृत्य कर खूब आनंद लूटा। गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर जी ने रावण वध की गाथा को भक्तों के समक्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि जब रावण ने विभीषण को भरी सभा में लात मारी तो विभीषण श्री राम की शरण में जा पहुँचे। यूँ तो राजनीति कहती है कि शत्रु के भाई पर कभी विश्वास नहीं किया जा सकता लेकिन श्री राम ने अपनी करुणा व नि:स्वार्थ प्रेम का परिचय देते हुए विभीषण को सहर्ष अपना लिया। ने केवल अपनाया, अपितु युद्ध से पहले ही उसे लंकेश भी घोषित कर दिया। केवल विभीषण ही क्यूँ, प्रभु ने तो उस नन्हीं सी गिलहरी के भावों को भी स्वीकार किया था जो अपने तन की रेत झाड़-झाड़कर समुद्र पर सेतुनिर्माण में अपनी सेवा निभा रही थी। क्या गज़ब के प्रेम, सौहार्द्र, भाईचारे व सद्भावना की झाँकी यह प्रसंग हमारे समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जो कि रामराज्य की संरचना के मूलभूत आधारस्तम्भ हैं। रामभक्त होने के नाते हमारा भी ये कर्त्तव्य है कि हम भी प्राणीमात्र से नि:स्वार्थ प्रेम करना सीखें। अर्थात् निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर ‘मैं’ से ‘हम’ तक का सफर तय करें।

प्रभु का सच्चा भक्त तो परपीड़ा को देख अपने क्षुद्र स्वार्थों को त्यागने में क्षण भर की भी देरी नहीं लगाता। उसके लिए तो सबसे श्रेष्ठ आसन है ‘आश्वासन’ जो वो दीन दु:खियों को देता है; सबसे उत्तम योग है ‘सहयोग’ जो वो यथाशक्ति प्राणीमात्र का करता है और सबसे लम्बी श्वास है ‘विश्वास’ जो वह रोती अखियों को प्रदान करता है। इसलिए अगर रामराज्य को साकार करना है तो आवश्यकता है अपने भीतर दया, प्रेम, त्याग व करुणा जैसे गुणों को विकसित करने की। और ये तब ही सम्भव है जब ब्रह्मज्ञान के माध्यम से हम श्री राम का दर्शन अपने घट में प्राप्त करेंगे। जब व्यक्ति अपने भीतर भगवान का साक्षात्कार करता है तो वह मन-बुद्धि के समस्त भेदों से ऊपर उठ समाज निर्माण में अपनी सशक्त भूमिका निभाता है। जब अंतर्घट में ब्रह्मज्ञान का दीप जलता है तो बाहर ईर्ष्या-द्वेष व स्वार्थ का अन्धकार अपने आप ही जलने लगता है और तब पूरी सृष्टि ही प्रेम के गीत गाती दीपोत्सव मनाती है।

संस्थान के प्रतिनिधित्व में स्वामी गोपालानंद जी, साध्वी श्वेता भारती जी एवं साध्वी वसुधा भारती जी आदि उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में शहर के अनेकानेक सम्मानित अतिथि जैसे – श्रीमान दीपक अग्रवाल जी एवं श्रीमती नीरू अग्रवाल जी, श्रीमान सुधांशु महेश्वरी जी एवं श्रीमती प्रीति महेश्वरी जी, श्रीमान अरुण अग्रवाल जी एवं श्रीमती रचना अग्रवाल जी, श्रीमान अशोक छारिया जी एवं श्रीमती साधना छारिया जी, श्रीमान अजब सिंह जी एवं श्रीमती सुनीता सिंह जी, श्रीमान वरुण जी, श्रीमान राजीव जिंदल जी, श्रीमान राजेंद्र जी, आदि उपस्थित रहे।
 
दिव्य गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी आज समाज के प्रत्येक व्यक्ति को यहीं ब्रह्मज्ञान प्रदान कर जन-जन में दैवीय गुणों यथा ऐक्य, शांति, प्रेम व सद्भावना का संचार कर रहे हैं। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान इसी ब्रह्मज्ञान के लिए समाज के हर वर्ग का आह्वान करता है जिससे इस धरा पे एक बार पुन: रामराज्य साकार किया जा सके, जहाँ हर दिन, हर पल, हर क्षण एक आनन्दोत्सव हो। कथा के अंतिम दिवस पंडाल में दीपावली उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया एवं कथा को विराम प्रभु की पावन आरती एवं प्रसाद वितरण से विराम दिया गया।

















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