हापुड़ के जाम से पस्त हुए शहरवासी ,अतिक्रमण व ई-रिक्शा बनी शहर में जाम लगने का कारण

हापुड़।
शहर में प्रतिदिन लगने वाले जाम का शिकार होने के बावजूद भी स्थानीय जिला व तहसील स्तरीय अधिकारी इस समस्या का समाधान नहीं निकाल सके है। जाम लगने के कारण पापड़ नगरी की पहचान अब जाम नगर के रूप में होने लगी है। जाम लगने से प्रतिदिन लाखों का डीजल पैट्रोल खर्च हो रहा है। जाम लगने का मुख्य कारण मार्गों पर दुकानों द्वारा अतिक्रमण करना व शहर में ई-रिक्शाओं की संख्या अधिक होना माना जाने लगा है।
चार दशक पूर्व हापुड़ के पापड़ की विदेशों तक धूम थी। जिस कारण यह दुनिया भर में पापड़ नगरी के नाम से विख्यात हो गया। शहर में प्रतिदिन लगने वाले जाम से अब पापड़ नगरी जाम नगर के नाम से देश विदेश में प्रसिद्घ होती जा रही है। इससे न सिर्फ यहां का व्यापार प्रभावित हो रहा है। बल्कि आये दिन राहगीरों के साथ साथ दुकानदारों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
हापुड़ नगर को जाम की समस्या से निजाम दिलाने के लिए राष्टï्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा निजाम से लेकर ततारपुर तक करोड़ों की लागत ने बाईपास का निर्माण कराया गया। जिसका उद्घाटन तत्कालीन राजग सरकार में भूतल परिवहन केन्द्रीय मंत्री रहे चन्द्रभुवन खंडूरी ने किया था। साथ ही उन्होंने जनपद की जनता को आश्वस्त किया था कि अब उन्हें जाम की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। किन्तु स्वार्थी वाहन चालक नहीं चाहते कि वह बाहर जाने के लिए बाईपास का प्रयोग करे। यहीं कारण है कि शहर में डग्गामार वाहनों की तादात इतनी अधिक बढ़ गयी है कि जाम पर काबू पाना टेढ़ी खीर लगती है।
हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण द्वारा लाखों की लागत से तहसील चौपला,मेरठ तिराहा,पक्का बाग चौराहा पर ट्रैफिक लाइटें लगवायी,जो एक भी नहीं चली,और कबाड़ में तब्दील हो गयी। हाल में ही पुलिस विभाग उक्त चौराहों पर लाखों की लागत से ट्रैफिक लाइट लगवायी,जो अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। और खंभों से टूटकर नीचे आ गयी है।
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व्यापार होने लगा प्रभावित
हापुड़ नगर में प्रतिदिन कई घंटे लगने वाले जाम से व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित होने लगा है। व्यापारियों का कहना है,कि जाम लगने से व्यापार प्रतिदिन घटता जा रहा है। अगर रही हाल रहा तो उन्हें दूसरे शहरों की ओर रुख करना पड़ेगा।
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अतिक्रमण व ई-रिक्शा बनी जाम लगने का कारण
शहर की जनता का कहना है,कि शहर में ई=रिक्शा की संख्या बहुत अधिक होना व दुकानदारों द्वारा सडक़ों पर अतिक्रमण करना भी शहर में जाम लगने का मुख्य कारण माना जा रहा है। लोगों का कहना है,कि ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर भी अंकुश लगना चाहिए। और सडक़ों से अतिक्रमण भी हटना चाहिए।
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अधिकारी नहीं निकाल सके समाधान
शहर के मुख्य तहसील चौराहा व मेरठ तिराहा पर लगने वाले जाम का शिकार जिला व तहसील स्तरीय अधिकारी प्रतिदिन हो रहा है। इसके बावजूद भी अधिकारी जाम की समस्या का समाधान नहीं निकाल सके है।












