श्रीमद्भागवत कथा: आत्मा न जन्म लेती है न मरती है, यह शरीर तो केवल एक वस्त्र की तरह है जिसे आत्मा बदलती है- कथा वाचक आरती वाजपेई

हापुड़ । छज्जूमल की धर्मशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा वाचक आरती वाजपेई ने दूसरे दिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन के मोह और शोक को दूर करते हुए आत्मा के अमरत्व का ज्ञान दिया, जिसमें बताया गया कि आत्मा न जन्म लेती है न मरती है, यह शरीर तो केवल एक वस्त्र की तरह है जिसे आत्मा बदलती है, और कर्म-फल के आसक्ति से रहित होकर, समत्व बुद्धि (समान अवस्था) से कर्तव्य (युद्ध) करने का उपदेश दिया |
जिसमें मुख्य रूप से यजमान पंडित अरविंद शर्मा सर्राफ , वरिष्ठता अधिवक्ता कृष्णकांत गुप्ता ,अंकुश ट्विंकल सर्राफ, वैभव गुप्ता, आयुष अरविंद शर्मा ,सचिन गुप्ता, सुलभ गोयल आदि सभी लोग उपस्थित रहे |
कथा में सदर विधायक विजयपाल आढती , क्षेत्रीय महामंत्री भारतीय जनता पार्टी विकास अग्रवाल , जिला अध्यक्ष हापुड़ कविता माधरे,मोहन सिंह पूर्व विधायक जयप्रकाश जी ,अमित शर्मा, नानक चंद शर्मा, जयप्रकाश वर्मा ,राहुल त्यागी आदि गढ़मान्य लोगों की उपस्थिति रही |












