खाद्य विभाग की बड़ी लापरवाही: छापे के बाद बर्फी की ‘लूट’: डस्टबिन से मिठाई उठा ले भागे लोग, अफसरों ने साधी चुप्पी

छापे के बाद बर्फी की ‘लूट’: डस्टबिन से मिठाई उठा ले भागे लोग, अफसरों ने साधी चुप्पी
हापुड़।
होली से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्ती ने शहर के मिठाई कारोबारियों में खलबली मचा दी है। इसी कड़ी में विभागीय टीम ने चर्चित प्रतिष्ठान गुरुदेव मावा पनीर भंडार पर छापामार कार्रवाई कर मावा, पनीर और बर्फी के सैंपल भरकर जांच के लिए सील कर दिए। त्योहार पर मावे से बनी मिठाइयों की भारी खपत को देखते हुए यह कार्रवाई की गई।
टीम ने दुकान में रखे स्टॉक की गहन जांच की और करीब 12 से 15 डिब्बे बर्फी को मौके पर ही नष्ट कराया। अधिकारियों का कहना था कि संदिग्ध गुणवत्ता की मिठाई को उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही खत्म करना जरूरी है। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही बर्फी के डिब्बे डस्टबिन में डाले गए, आसपास मौजूद कुछ लोगों ने हाथों-हाथ उन्हें उठाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते डस्टबिन ‘मिठाई काउंटर’ में बदल गया और लोग डिब्बे लेकर फरार हो गए। मौके पर मौजूद लोग यह नजारा देख हैरान रह गए। जिस मिठाई को विभाग ने असुरक्षित मानकर नष्ट कराया, वही मिठाई कुछ ही मिनटों में लोगों के हाथों में पहुंच गई।
इस संबंध में जब पत्रकारों ने अधिकारियों से सवाल किए कि यदि मिठाई संदिग्ध थी तो उसे सुरक्षित तरीके से नष्ट क्यों नहीं कराया गया, तो अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। कैमरों के सामने वे आजू-बाजू देखते रहे और संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं दे सके। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या विभागीय कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई? अगर मिठाई वाकई खराब थी तो उसे दोबारा लोगों तक पहुंचने से रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी? होली के रंगों के बीच यह ‘बर्फी कांड’ शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है, और लोग अब लैब रिपोर्ट के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही का भी इंतजार कर रहे हैं।












