पिलखुवा की मोनाड यूनिवर्सिटी पर पीएचडी पर लगाई 5 साल की रोक, छात्रों को एडमिशन ना लेनें की सलाह, जिलें का नाम किया बदनाम

पिलखुवा की मोनाड यूनिवर्सिटी पर पीएचडी पर लगाई 5 साल की रोक, छात्रों को एडमिशन ना लेनें की सलाह
हापुड़।
थाना पिलखुवा क्षेत्र स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्रियों व मार्कशीट में चेयरमैन सहित 11 कर्मचारियों के जेल जाने के बाद अब यूजीसी ने यूनिवर्सिटी में अनियमितताओं के चलते पांच साल के लिए पीएचडी प्रोग्राम पर यूजीसी ने रोक लगा दी है।
जानकारी के अनुसार पिलखुवा के अनवरपुर स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी में एसटीएफ ने दो माह पूर्व छापेमारी कर भारी मात्रा में फर्जी डिग्रियों व मार्कशीट बरामद की थी,जिसके चलते यूनिवर्सिटी चेयरमैन बिजेंद्र सिंह सहित 11 लोगों को जेल भेज दिया था।
इसके बाद यूजीसी ने मोनाड यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक अनियमितताओं की शिकायतों के बाद पांच साल 2025-26 से 2029-30 तक के लिए पीएचडी प्रोग्राम पर यूजीसी ने रोक लगा दी है।
यूजीसी के सचिव प्रोफेसर मनीष जोशी के अनुसार विश्वविद्यालय पीएचडी विनियमों और शैक्षणिक मानदंडों का पालन नहीं कर रहा था। इस मामले में यूजीसी ने एक स्थाई समिति गठित की थी। समिति की जांच में विश्वविद्यालय द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया गया।
विश्वविद्यालय को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद यूजीसी ने यह कठोर निर्णय लिया। यूजीसी ने छात्रों और अभिभावकों को चेतावनी दी है। उन्हें इस विश्वविद्यालय के पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला नहीं लेना चाहिए। इस दौरान की गई पीएचडी डिग्री को उच्च शिक्षा और नौकरी के लिए मान्यता नहीं मिलेगी।












