गंगा मैया की शुद्धि का वाहक है घड़ियाल -भारत भूषण गर्ग डॉल्फिन गार्जियन

हापुड़।
गढ़मुक्तेश्वर यूं तो इस समय बाढ़ की विभीषिका के कारण से चहूं और जल ही जल दिखाई दे रहा है परंतु इस जल के बीच भी कुछ समाचार प्रकृति के पोषण का प्रतीक बनते जा रहे हैं उन्ही में से एक है स्वर्गद्वारी पुष्पावती पूठ धाम में नर घड़ियाल का दिखाई देना। डॉल्फिन गार्जियन भारत भूषण गर्ग ने आज लगभग 15 फीट लंबे नर घड़ियाल को निहारते हुए बताया कि इतना बड़ा घड़ियाल उन्होंने भी जीवन में पहली बार देखा है नर घड़ियाल,घड़ियालों में दुर्लभ होता है यह लगभग 1000 मादा घड़ियालों के ऊपर ही एक नर घड़ियाल पाया जाता है।
भारत भूषण गर्ग ने बताया कि पिछले 25 वर्षों से स्वामी विवेकानंद विचार मंच एवं लोक भारती के तत्वाधान में जो इस क्षेत्र में जलचर, वन्यजीवों एवं प्रकृति को बचाने की मुहिम चलाई जा रही है यह उसी के सुखद परिणाम है कि आज पर्याप्त मात्रा में इस रामसर साइट में जलीय जीवों का आगमन एवं विचरण बहुत ही शानदार तरीके से हो रहा है उन्होंने बताया कि इतना बड़ा घड़ियाल को देखकर लोगों में कुछ थोड़ा बहुत डर प्रारंभ में हो रहा था परंतु जब उन सबके साथ बैठक की गई तब उन्हें बताया गया कि घड़ियाल मानव को नहीं छेड़ता है वरन यह तो मृत जानवरों अथवा छोटी मछलियों का ही शिकार करता है आप इसके अधिक निकट न जाएं यदि आप ज्यादा अधिक निकट जाएंगे तब इसके हिंसक होने की संभावनाएं बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि घड़ियाल एवं अन्य जलचरों का इस क्षेत्र में दिखाई देना यहां के लिए बहुत ही सुखद वातावरण का एहसास कराती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि यहां एक जलचर चौकी की स्थापना की जाए जिससे यहां अन्य जलचर भी निर्भीक होकर गंगा में विचरण कर सकें।
इस अवसर पर उनके साथ सत्यनारायण चौहान महेश केवट मूलचंद आर्य विनोद कुमार लोधी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।












