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नाबालिग की गला काटकर हत्या करने वाले आरोपी को 18 वर्ष बाद सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट ने सुनाया फैसला, दोषी पर लगाया 50 हजार का अर्थदंड

हापुड़। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट ने एक नाबालिग की गला काटकर हत्या करने के मामले में करीब 18 वर्ष की लंबी सुनवाई के बाद बृहस्पतिवार को निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

अतिरिक्त जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश चंद शर्मा ने बताया कि हापुड़ नगर कोतवाली में नूर मोहम्मद ने एक रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें उसने कहा कि उसका पुत्र सलीम आयु 17 वर्ष मोहल्ला निवाजीपुरा में स्थित पशु वधशाला में पशु काटने का काम करता था। उसका दूसरा पुत्र नदीम भी पशु वधशाला में कार्य करता है। वह स्वयं नमक बेचने का काम करता है। 23 मई 2005 को उनके दोनों पुत्र पशु कटान का कार्य कर रहे थे। उनके पास ही नौशाद पुत्र मोहम्मद अली व उसका भाई दिल्लू उर्फ दिलशाद निवासी निवाजीपुरा नगर कोतवाली भी कार्य कर रहे थे।

तभी किसी बात को लेकर उनके पुत्र सलीम की नौशाद से कहासुनी हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि नौशाद के भाई दिल्लू उर्फ दिलशाद ने उनके पुत्र सलीम को पकड़ लिया। जिसके बाद नौशाद ने उसके पुत्र की छुरी से गर्दन काटकर हत्या कर दी। घटना को अंजाम देकर दोनों भाई मौके से फरार हो गए। पुलिस ने दोनों भाईयों द्वारा एक राय होकर हत्या करने का मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने मामले के आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किए।

मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट में चल रही थी। उनके द्वारा न्यायालय में मजबूत पैरवी की गई है। जिसके चलते उनके द्वारा अभियोजन पक्ष की तरफ से 11 गवाह न्यायालय में पेश किए गए। साथ ही आरोपियों के खिलाफ कई बड़े साक्ष्य भी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। न्यायाधीश मृदुल दुबे ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बृहस्पतिवार को मामले में निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि यह प्रकरण काफी गंभीर है।

अभियुक्त दिल्लू उर्फ दिलशाद ने सलीम की हत्या के लिए उसको पकड़ा था। जिसकी मदद से नौशाद द्वारा सलीम पर छुरी से वार कर उसकी गर्दन काट दी। जिससे उसकी मृत्यु हो गई। इसलिए अभियुक्त दिल्लू को हत्या का दोषी करार दिया जाता है। यह अपराध एक जघन्य अपराध है। किन्तु प्रकरण विरल से विरलत की श्रेणी में नहीं आता है। ऐसे में अभियुक्त दिल्लू उर्फ दिलशाद को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया जाता है। साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की आधी धनराशि 25 हजार रुपये मृतक के परिजनों को देने के आदेश भी किए।

















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