कवि सम्मेलन आयोजित, इतना मशहूर हुआ तुमसे मोहब्बत करके,मर गया तो किताबों में मिलूंगा तुमसे – डॉ.सतीश

हापुड़ ।
जायंट्स ग्रुप ऑफ हापुड़ के तत्वावधान में एक भव्य विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता योगेश गर्ग ने की, जबकि मंच संचालन का दायित्व सुप्रसिद्ध ओज के कवि डॉ. अनिल बाजपेई ने निभाया।
डॉ. सतीश वर्धन (पिलखुवा) ने अपनी प्रसिद्ध रचना से श्रोताओं को भावविभोर किया:
“महके महके से गुलाबों में मिलूंगा तुमसे,
नींद आएगी तो ख्वाबों में मिलूंगा तुमसे,
इतना मशहूर हुआ तुमसे मोहब्बत करके,
मर गया तो किताबों में मिलूंगा तुमसे।”
डॉ. अनिल बाजपेई (हापुड़) ने अपने ओजस्वी स्वर में प्रेम, प्रकृति और मानवता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया:
“ ढूंढा एक हज़ार मिले ,सबके सब मक्कार मिले
देखे शेर कई जंगल में, सारे रंगे सियार मिले।
पाती मैंने प्रेम की भेजी, क्रोध में लिक्खे तार मिले,
सब कुछ चकाचौंध दिखता है, धुन्ध धुंआ धुआँ गुवार मिले।”
डॉ. आराधना बाजपेई ने अपनी कोमल भावनाओं से सभी को मंत्रमुग्ध किया:
“सागर की लहरें कहें चलता चल इंसान,
अंबर में भरनी तुझे
ऊँची अभी उड़ान।
जीवन में तुमको। पथिक रहे सदा यह ज्ञान,
घबराना बिल्कुल नहीं, हो आधी तूफ़ान।”
डॉ. निवेदिता शर्मा (ग़ाज़ियाबाद) ने भक्ति एवं अध्यात्म से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत की:
“राम हैं साधना, राम आराधना,
राम भक्तों के मन की है प्रार्थना।
राम का नाम लेकर जो आगे बढ़ा,
पूरी हुई उसकी हर कामना।”
संजय गोयल ने प्रेरणादायक भावों से भरी रचना पढ़ी:
“अँधियारे में आशा की लौ जलाता है दीप,
नन्हा सा होते हुए भी सूरज को मात देता है दीप।”
योगेश गर्ग ने प्रेम की परिभाषा को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया:
“प्रेम वह दीप है जो जलता नहीं, जलाता नहीं,
बस मन के मंदिर में उजियारा फैलाता है।”
ने दीपावली की सुंदरता पर पवन सक्सेना ने अपनी रचना से मन मोह लिया:
“दीपों की पंक्ति में सजे उजियारे के फूल,
हर हृदय में जल उठे प्रेम, शांति और उसूल।”
राजेश शर्मा ने भी काव्य पाठ कर सभा में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर मुकेश, आर. जी. दिवाकर, लोकेश, योगेश गर्ग, पवन सक्सेना, राजेश शर्मा, संजय गोयल, मनोज कर्णवाल, अजय महेश्वरी, विनय चौधरी, पंकज अग्रवाल, अनुराग गर्ग, अजय बंसल, तथा अनुज सिंघल का विशेष सहयोग एवं योगदान रहा।
सभी कवियों को जायंट्स ग्रुप ऑफ हापुड़ की ओर से सम्मान प्रतीक और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।
पूरा सभागार काव्य, ओज, प्रेम और आध्यात्मिकता के प्रकाश से आलोकित रहा।
यह आयोजन केवल कवि सम्मेलन नहीं, बल्कि शब्दों की दीपावली था,
जहाँ हर पंक्ति ने आत्मा को छुआ और हर भाव ने उजियारा बिखेरा।












