M&M Project OM Prime Estate ATMS College of Education
Astrology

कुंडली में सूर्य बलवान तो कल्याण ही कल्याण

भारतीय वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य को समस्त ग्रहों का राजा माना जाता है और इसे समस्त प्राणी जगत को जीवन प्रदान करने वाली उर्जा का केंद्र भी माना जाता है। सूर्य को ज्योतिष की गणनाओं के लिए पुरुष ग्रह माना जाता है। प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में सूर्य को आम तौर पर उसके पिता का प्रतिनिधि माना जाता है जो उस व्यक्ति के इस प्राणी जगत में जन्म लेने का प्रत्यक्ष कारक होता है ठीक उसी प्रकार जैसे सूर्य को इस प्राणी जगत को चलाने वाले प्रत्यक्ष देवता का रूप माना जाता है।

कुंडली में सूर्य के बलवान होने पर कुंडली धारक सामान्यतया समाज में विशेष प्रभाव रखने वाला होता है। अपनी संवेदनाओं और भावनाओं पर भली भांति अंकुश लगाने में सक्षम होता है। इस प्रकार के लोग आम तौर पर अपने जीवन के अधिकतर निर्णय तथ्यों के आधार पर ही लेते हैं न कि भावनाओं के आधार पर।

ऐसे लोग सामान्यतया अपने निर्णय पर अड़िग रहते हैं तथा इस कारण इनके आस-पास के लोग इन्हें कई बार अभिमानी भी समझ लेते हैं जो कि ये कई बार हो भी सकते हैं किन्तु अधिकतर मौकों पर ऐसे लोग तर्क के आधार पर लिए गए सही निर्णय की पालना ही कर रहे होते हैं तथा इनके अधिक कठोर लगने के कारण इनके आस-पास के लोग इन्हें अभिमानी समझ लेते हैं।

अपने इन गुणों के कारण ऐसे लोगों में बहुत अच्छे नेता, राजा तथा न्यायाधीश बनने की क्षमता होती है। इस लिए किसी भी व्यक्ति की कुंडली का अध्ययन करते समय कुंडली में सूर्य की स्थिति, बल तथा कुंडली के दूसरे शुभ तथा अशुभ ग्रहों के सूर्य पर प्रभाव को ध्यानपूर्वक देखना अति आवश्यक है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।



Source link

Arun Kumar Jindal

Mudit Bansal

Vivek Goel Sarraf

Raghav Khajanchi


Om Prime Estate


RCC Society in Hapur


JMS World School


Brainwaves International School


J P Public School


MH vivekanand Sr Secondary School


Kidzee


Delhi City School


SCM Global School



Show More
Back to top button

You cannot copy content of this page