हापुड़ में “दोमयी मंदिर” में होती है भक्तों की मनोकामना पूर्ण, नवरात्रि पर रहती है भक्तों की भीड़ , भगवान श्रीकृष्ण के पड़े थे चरण

हापुड़ में “दोमयी मंदिर” में होती है भक्तों की मनोकामना पूर्ण, नवरात्रि पर रहती है भक्तों की भीड़ , भगवान श्रीकृष्ण के पड़े थे चरण
हापुड़ (यर्थाथ अग्रवाल मुन्ना)।
हापुड़ तहसील के गांव दोमयी में सर्वव्यापिनी 66 आदिशक्ति” श्री माता महाकाली का सिद्धपीठ एक प्राचीन मन्दिर है, जहां श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती हैं। नवरात्रि में यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है। मंदिर में श्रीकृष्ण भगवान के चरण पड़े थे।
नगर के स्वर्ग आश्रम रोड़ के गांव दोमयी में 200 साल पूर्व एक साईकिल वाली बुजुर्ग महिला को एक रात में सपना आया है कि दोमयी गांव में काली मां का मठ है। जब महिला ने सुबह उठकर देखा,तो जमीन के नीचे की तरफ काली माता की प्रतिमा दिखाई दी,तब गांव वालों ने एकत्र होकर मां काली का प्राचीन मंदिर है। जहां महिलाएं बच्चों की लंबी आयु की कामना लेकर आती हैं और मीठे पूड़े और चने का प्रसाद चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में जो श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं जाता है।
मंदिर की प्रबंध समिति के प्रधान उत्तम चंद गोयल ने बताया कि यह मंदिर हापुड़ ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के लोगों के लिए भी आस्था का केंद्र बना हुआ है।नवरात्रि में विशेष अनुकंपा होती है, मां का पंचामृत से स्नान अभिषेक किया जाता है।
उन्होंने बताया कि मंदिर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। आज तक इस प्राचीन मंदिर में किसी भी प्रकार से सरकारी सहायता नहीं मिली है।
उन्होंने बताया कि यहां महर्षि दोम ने यज्ञ आयोजित किया था। जिससे इस गांव का नाम दोमयी गांव पड़ गया था।
ग्रामीणों ने बताया कि प्राचीन काल में जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा से हस्तिनापुर जा रहे थे,तो रास्ते में इसी जगह रूके थे और आज भी वहां पर कर्दम का पेड़ है, जहां श्रद्धालुओं रोज पूजा पाठ करते हैं ।
उन्होंने बताया कि आदिशक्ति “पार्वती” जो महाकाली के रूप में है वे ही कलियुग में सबसे अधिक फल देने वाली है साथ ही-मंत्र-यंत्र-तंत्र की सिद्धिदात्री भी है।जो भी इनकी उपासना हदय से करता है, उन भक्तों की झोली भगवती क्षण में ही भर देती है।
ग्रामीणों के अनुसार प्राचीन व सिद्धपीठ मंदिर में दिल्ली, एनसीआर व आसपास के राज्यों से सैकड़ों श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और मां काली के आर्शीवाद से सब की इच्छा पूरी होती है।