फिर कब आओगे मेरे राम के साथ , साप्ताहिक रामचरित मानस का हुआ समापन

फिर कब आओगे मेरे राम के साथ गाँव शाहपुर फगोता में चल रहे साप्ताहिक रामचरित मानस का समापन
गाँव शाहपुर फगोता में चल रहे साप्ताहिक रामचरित मानस पाठ का बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ का सम्पन्न हुआ। प्रतिदिन की भांति सायं 5 बजे से 10 बजे तक आयोजित इस पाठ में लंकाकांड व उत्तर कांड का वर्णन किया गया।
गांव सपनावत से कथा मंडली व कथा वाचक रामावतार शिशोदिया ने मेघनाथ] रावण युध लक्षमण जी को शक्ति लगना]हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाना] भगवान राम का नाग पास में बधना आदि प्रशगों को बडे़ ही मधुर रूप से प्रस्तुत किया।
कथावाचक ने बताया जब विपरीत परिस्थितियॉ होती है व्यक्ति की बुद्यि भी उसी प्रकार कार्य करती है मन्दोदरी व कुम्भकरण के बार-बार समझाने पर भी रावण अपने ही अंहकार में किसी की बात नही मानी। लक्षमण जी को शक्ति लगने पर जब सुशेन वेद्य को बुलाया गया उसने राम को अपना विरोधी होने पर भी अपने धर्म का पालन करते हुए सही औषधी व स्थान बतायाA जिससे लक्ष्मण जी मुर्छा दूर हो सके ओर लक्ष्मण पुर्नजीवित हो सकें। आज कलयुग में इस प्रकार की घटना होने पर कोई इस प्रकार अपने धर्म का पालन कर सकता है कहना सम्भव नही है। समापन के पहले काकभुशुंडी जी व गरूड जी के मध्य एक साधारण कोआ को भगवान की भक्ति कैसे प्राप्त हुई की भी वार्तालाप हुआA जिसमें काकभुशुंडी जी ने बताया कि बार-बार गलती करने पर भी उसके सरल स्वभाव से ही उसे भगवान की प्राप्ति हुई। ग्रामवासी कथा सुनकर प्रेम आसुओं के साथ रोने लगें ओर पुनः इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने के लिए उत्सुक दिखें। अन्त में मण्डली के सदस्य रामअवतार शिसोदिया] राहुल नम्बरदार] अनुज शिशौदिया]राधेश्याम शिशौदिया] टिटू शिशौदिया] कान्हा ठेकेदार व डा0 राजू शिशौदिया को ग्रामवासियों ने प्रशस्ति पत्र व पटका पहनाकर समानित व धन्यवाद ज्ञापित किया। रविवार को 10 बजे से भण्डारे व प्रसाद वितरण का आयोजन किया जायेगा।













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