IPL की आड़ में सट्टे का गंदा खेल: हापुड़ में युवा हो रहे बर्बाद, लत पूरी करने के लिए घर में ही करने लगे ‘क्राइम’

IPL की आड़ में सट्टे का गंदा खेल: हापुड़ में युवा हो रहे बर्बाद, लत पूरी करने के लिए घर में ही करने लगे ‘क्राइम’
हापुड़( यथार्थ अग्रवाल मुन्ना) ।
देश में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का मैच शुरू होते ही हापुड़ ज़िले में सट्टेबाजों का काला कारोबार भी चरम पर पहुंच गया है। क्रिकेट प्रेमियों के मनोरंजन के लिए शुरू हुआ यह खेल अब नगर के कई परिवारों के लिए बर्बादी का सबब बन चुका है। सट्टे की इस दलदल में फंसकर ज़िले की युवा पीढ़ी न सिर्फ आर्थिक रूप से कंगाल हो रही है, बल्कि अपनी लत को पूरा करने के लिए घर के भीतर ही ‘क्राइम’ (चोरी) करने से भी बाज नहीं आ रही है।
हर बॉल, कैच और रन पर लग रहे हैं लाखों के दांव
आईपीएल मैच की पहली गेंद फिंकने के साथ ही सट्टा खिलाने और खेलने वालों के चेहरे खिल जाते हैं। जानकार बताते हैं कि इस खेल में अब सिर्फ हार-जीत पर ही दांव नहीं लगता, बल्कि मैच के हर मोड़ पर सट्टेबाज़ी होती है। किस बॉल पर शॉट लगेगा, कब कैच छूटेगा, किस ओवर में कितने रन बनेंगे—हर एक गतिविधि पर कोड वर्ड के ज़रिए लाखों रुपये दांव पर लगा दिए जाते हैं।
घर की जमा-पूंजी साफ कर रहे हैं युवा
इस लत का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि नगर के कई युवा इसके चक्कर में आकर अपने ही घर में अपराधी बन रहे हैं। सट्टे में हारी रकम को चुकाने या नया दांव लगाने के लिए युवा अपने ही पिता की जीवनभर की जमा-पूंजी पर हाथ साफ कर रहे हैं। घर में चोरी करने के अलावा कई युवा बाजार से भारी ब्याज पर उधार लेकर दांव लगा रहे हैं, जिससे हंसते-खेलते परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
नगर के इन प्रमुख इलाकों में सक्रिय हैं ‘बुकी’
सूत्रों की मानें तो नगर में यह अवैध कारोबार बेहद योजनाबद्ध तरीके से व्यापक पैमाने पर चलाया जा रहा है। नगर की कई तंग गलियों में सटोरियों का नेटवर्क धड़ल्ले से ऑपरेट हो रहा है।
हाईटेक हुआ सट्टे का तरीका
अब सटोरियों को किसी एक जगह जुटने की जरूरत नहीं पड़ती। सट्टे का यह पूरा खेल मोबाइल फोन पर गोपनीय भाषा (Secret Language) और कोड वर्ड के माध्यम से ऑनलाइन संचालित किया जा रहा है, जिससे आम लोगों के लिए इसे पकड़ पाना मुश्किल होता है।
पुलिस की ‘मौन’ कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
हैरानी की बात यह है कि पूरे नगर में चर्चा का विषय बने इस अवैध कारोबार की भनक स्थानीय पुलिस प्रशासन को नहीं है। पुलिस हर बार “सटीक सूचना मिलने पर कार्रवाई” करने का घिसा-पिटा तर्क देकर मौन साधे बैठी है। पुलिस की इस बेरुखी और अनदेखी ने महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने की बार पुलिस से मांग करते हुए कहा कि इस अवैध और विनाशकारी कारोबार को अंजाम देने वाले मुख्य ‘बुकियों’ और उनके सक्रिय गुर्गों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि युवाओं के भविष्य को अंधकार में डूबने से बचाया जा सके।
सट्टे की बढ़ती समस्या
बता दें कि आईपीएल मैचों के दौरान तो यह धंधा तेजी से फल फूलने लगता है। क्रिकेट मैच शुरू होते ही हर बाॅल पर लाखों रुपये का सट्टा लगाया जाता है। फोन पर ही यह धंधा तेजी से चल रहा है। युवाओं को इस धंधे में जुड़े लोग प्रलोभन कर अपने जाल में फंसा लेते हैं। शहर में क्रिकेट मैच पर सट्टा एक दशक से भी अधिक समय से चल रहा है। शुरू में इस अवैध धंधे में कम लोग ही जुड़े थे, लेकिन अब कुछ सटोरियों ने नगर में अपने गुर्गों छोड़ रखे हैं।, जो युवाओं को अपने जाल में फंसाकर सट्टा लगाते हैं। कुछ प्रमुख सटोरियों ने दिल्ली, नोएडा, हरिद्वार, मंसूरी, नैनीताल में फ्लैट ले रखे हैं, जहां बैठकर इस धंधे को संचालित कर रहे हैं।
आत्महत्या के प्रयास
कर्जे में फंसकर कई सटोरिए आत्म हत्या और आत्महत्या का प्रयास कर चुके हैं। करीब एक दशक से अधिक समय पहले चैंबर आॅफ काॅमर्स में एक व्यक्ति ने अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली माकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि कई अन्य लों ने आत्महत्या करने का प्रयास किया या फिर कर्जे के कारण शहर छोड़कर चले गए। कोतवाली पुलिस द्वार की गई इस कार्रवाई से सट्टेबाजों में अफरा तफरी मच गई है। शहर के बाहर रहने वाले सटोरिएं अपने गुर्गों की मदद से पुलिस कार्रवाई की जानकारी ले रहे थे।











