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वृद्धाश्रम में आयोजित हुआ कवि सम्मेलन,काव्य मनीषी हिंदी की उपयोगिता को जन जन तक पहुंचाएं – राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.सुबोध गर्ग

हापुड़। अखिल भारतीय साहित्यालोक एवं आवासीय वृद्धाश्रम संचालित संस्था जनहितकारी सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में यहां दोयमी रोड स्थित आवासीय वृद्धाश्रम में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सभी कवियों को “जगदीश चंद ढींगरा सम्मान” से सम्मानित किया गया
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता प्रख्यात गीतकार डा राधे श्याम मिश्र ने की तथा मंच का संचालन प्रख्यात कवि डा.अनिल बाजपेई ने किया।

कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि अखिल भारतीय साहित्यालोक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा सुबोध गर्ग , विशिष्ट अतिथि प्रमोद गुप्ता, गोपाल शर्मा ,गीतकार राष्ट्रीय कवि जय सिंह आर्य, डा राधेश्याम मिश्र ने दीप प्रज्वलन करके किया।

डा सुबोध गर्ग ने कहा काव्य मनीषी हिंदी की उपयोगिता को जन जन तक पहुंचाएं एवं हिंदी के संवाहक बनें।
राष्ट्रीय व्यापार मंडल के जिला अध्यक्षअमित शर्मा(टोनी) एवं
प्रसिद्ध समाजसेवी विशिष्ट अतिथि वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष पंडित गोपाल शर्मा , समाजसेवी प्रमोद गुप्ता ने कहा वृद्ध हमारे पूज्यनीय एवं वंदनीय हैं।हमें उनका आशीष प्राप्त करते रहना चाहिए।
मंच का संचालन करते हुए प्रख्यात कवि डा. अनिल बाजपेई ने पढ़ा,”धूप गुनगुनी खुशनुमा,शीतल धरती अम्बर।
द्वार खड़ा नव वर्ष है,कहता माह दिसंबर।”
खट्टी मीठी याद का,करें भाग अरु जोड़।
अच्छी अच्छी साथ रखो,कड़वी पीछे छोड़।कानपुर से पधारे कवि डा राधे श्याम मिश्र ने कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए पढ़ा,” जिसका लक्ष्य बड़ा होता है , आगे वही खड़ा होता है , होती जय जयकार उसी की, जो रण भूमि लड़ा होता है।
दिल्ली से पधारे प्रख्यात कवि डा जय सिंह आर्य ने पढ़ा “जो अपने बुजुर्गों की सेवा करेगा ,
उसे उनकी सेवा का मेवा मिलेगा,
तो खुद को बुजुर्गों की सेवा में कर ले ,
जो आशीष उनका निश्चित फलेगा”
डा आराधना बाजपेई ने पढ़ा,जीवन के सफर दोस्तो मुश्किल तो बहुत हैं पर पी सको तुम दर्द तो मंजिल भी बहुत हैं पूनम के साथ आती हैं काली रात भी,पर बन सको तुम दीप तो उजियार बहुत हैं। नजीबाबाद से पधारे वरिष्ठ कवि प्रदीप डेजी ने कहा… मेरे मां-बाप के कदमों में जन्नत का बिछौना है। उन्ही का प्यार चांदी है उन्ही का प्यार सोना है ।। जो कांधे मेरे बचपन में मुझे दुनिया दिखाते थे । उन्ही कांधों पे सर रखकर मुझे कुछ देर रोना है।गाजियाबाद से पधारे हास्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉक्टर जयप्रकाश मिश्र ने अपनी प्रस्तुति देते हुए कहा_
ढली है चांदनी लेकिन सितारे और बाकी हैं
अभी जल्दी कहां की है नजारे और बाकी हैं
सफेदी देख बालों की बुढ़ापा मत समझ लेना
बुझी है आग ऊपर से अँगारे और बाकी हैं। बिजनौर से आये डा० प्रमोद शर्मा प्रेम ने कहा
मेरी राहों में यूं कांटे बिछाकर।
खडे हैं अपने कितनी दूर जाकर।
मेरे पांवों से निकलेगा लहू जब।
वही देखेंगे मुझको मुस्कुराकर। एटा से पधारे कवि राजेश यादव ने पढ़ा,”मोदी योगी ने इस राजनीति के मानदंड हैं बदले,
अब एक हाथ में संविधान है एक हाथ में गीता.” नोएडा से पधारी कवयित्री डॉ.इला जायसवाल ने इन पंक्तियों में अपनी बात कही – ऐसे डूबा आज सूरज , स्व विधाता खो गया। फूल जो डाली से टूटा, माटी का ही हो गया।लक्ष्मण यति ने पढ़ा,बिल्ली चूहे को सिखा रही। हिंसा करना पाप है,क्षण भर में लगा पता,वह चूहा ही साफ है।
वृद्धाश्रम संचालिका रीतिका शर्मा,ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया आश्रम के बुजुर्ग पूरे वर्ष कवि सम्मेलन का इंतजार करते हैं।आश्रम संचालिका रीतिका शर्मा,उपसंचालिका पूनम पदाधिकारी अर्पित एवं विनीत ने सभी कवियों को पटका,बुके,स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
विशिष्ट अतिथि संजय त्यागी देवनंदिनी हॉस्पिटल,मोहित जैन , अनिल कंसल,अमित शर्मा टोनी आर के प्लजा अशोक मित्तल का सहयोग रहा।
विशाल अग्रवाल ,अभिलाष सहित की गणमान्य लोग उपस्थित थे





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