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शहर में आवारा कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण और रेबीज रोकथाम का जिम्मा ‘जीव दया फाउंडेशन’ को सौंपा, टीम कर रही है कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण, जनता से की सहयोग की अपील

हापुड़।

नगर पालिका परिषद हापुड़ की ओर से शहर में आवारा कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण और रेबीज रोकथाम का जिम्मा ‘जीव दया फाउंडेशन’ को सौंप दिया गया है। कार्य – आदेश मिलने के बाद संस्था ने शहर के विभिन्न वार्डों से स्ट्रीट डॉग्स को पकड़कर उनकी नसबंदी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) और एंटी-रेबीज टीकाकरण का काम तेजी से शुरू कर दिया है।
इस अभियान के तहत संस्था ने जनता के बीच एक विशेष जागरूकता अभियान भी छेड़ दिया है। अक्सर लोगों को लगता है कि पकड़े जाने के बाद कुत्तों को कहीं दूर छोड़ दिया जाएगा, लेकिन संस्था ने कानूनी नियमों का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की है।

क्या कहती हैं AWBI गाइडलाइंस और सुप्रीम कोर्ट का आदेश?

संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ना कोई मनमर्जी नहीं, बल्कि देश के कानून और सर्वोच्च न्यायालय का सख्त आदेश है:

एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स, 2023: भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों के तहत स्थानीय निकायों के लिए यह अनिवार्य है कि वे गली के कुत्तों को पकड़कर केवल उनकी नसबंदी और वैक्सिनेशन कराएं। इसके बाद उन्हें *उसी वार्ड या गली में वापस छोड़ना होगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था*।
कुत्तों को किसी दूसरे इलाके में विस्थापित (Relocate) करना पूरी तरह गैर-कानूनी है।



सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (मई 2026):माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने अपने हालिया फैसले में स्पष्ट किया है कि पूरे देश में ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स’ को सख्ती से लागू किया जाए। कोर्ट ने साफ किया है कि आम रिहायशी गलियों और सोसाइटियों से कुत्तों को स्थायी रूप से हटाकर कहीं और नहीं फेंका जा सकता, क्योंकि इससे ‘वैक्यूम इफेक्ट’ पैदा होता है और बाहर के नए व अधिक आक्रामक कुत्ते उस इलाके में आ जाते हैं।
> *कोर्ट द्वारा तय किया गया अपवाद *
> सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में केवल संवेदनशील ‘संस्थागत क्षेत्रों’ (जैसे स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड) और अत्यधिक आक्रामक/रेबीज से पीड़ित कुत्तों को ही वैक्सिनेशन के बाद शेल्टर होम में रखने की छूट दी है। आम रिहायशी कॉलोनियों और गलियों के शांत कुत्तों को नसबंदी के बाद उनकी मूल जगह पर ही लौटाया जाएगा।
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### *जनता से सहयोग की अपील*
नसबंदी के बाद कुत्तों का व्यवहार बेहद शांत हो जाता है और वे रेबीज मुक्त होकर समाज के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करते हैं। जीव दया फाउंडेशन ने हापुड़ वासियों से अपील की है कि जब उनकी टीम गली-मोहल्लों में काम के लिए पहुंचे, तो स्थानीय नागरिक किसी भ्रम में आकर टीम का विरोध करने के बजाय सहयोग करें, ताकि हापुड़ को रेबीज-मुक्त और सुरक्षित बनाया जा सके।















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