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श्रीराम कथा: दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान करवाता है ईश्वर का साक्षात् दर्शन- डॉ. सर्वेश्वर

श्रीराम कथा: दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान करवाता है ईश्वर का साक्षात् दर्शन- डॉ. सर्वेश्वर
हापुड़।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अर्जुन नगर के सामने वाला ग्राउंड, स्वर्ग आश्रम रोड, हापुड़ में 17-23 मई 2026 तक आयोजित श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस, अर्थात्‌ 21 मई, 2026 को कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर जी ने केवट प्रसंग को बहुत ही भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि श्री राम केवट से गंगा पार कराने के लिए नौका की माँग करते हैं। लेकिन केवट यह कहते हुए साफ मना कर देता है कि जब तक प्रभु उससे चरण-प्रक्षालन नहीं करवाएँगे, वह उनको नौका में नहीं बिठाएगा। केवट बार-बार प्रभु से भावपूर्ण निहोरे करता है और अंततः प्रभु केवट के प्रेमभाव पे रीझ कर उसे चरण-प्रक्षालन की अनुमति प्रदान कर देते हैं। स्वामी जी ने बताया कि यह घटना निष्कामता का प्रतीक है। जब एक भक्त के भीतर निष्काम भक्ति जन्म लेती है तब उसे ईश्वर से नहीं माँगना पड़ता अपितु भगवान स्वयं उसके द्वार पर माँगने के लिए आ जाते हैं। केवट प्रभु को भावभीनी विदाई देता है और प्रभु वन की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। आगे वन में शूर्पनखा द्वारा प्रेरित हुआ रावण एक साधु का छद्म वेश धारण कर आता है और माता जानकी का अपहरण कर उन्हें लंका ले जाता है।

कथा का मर्म समझाते हुए स्वामी जी ने बताया कि माता सीता ने केवल रावण के वेश पर विश्वास किया और बदले में उनकी श्रद्धा का अपहरण हो गया। ये प्रसंग सीख देता है की केवल बाहरी वेश ही गुरु की पहचान नहीं होता। ऐसा साधु वेश तो कालनेमि ने भी धारण किया था हनुमान जी को भ्रमित करने के लिए। जैसे एक चिकित्सक के वस्त्र पहनने मात्र से कोई ऑपरेशन करने की कला का ज्ञाता नहीं हो जाता, ऐसे ही केवल बाहरी वेश धारण करने से कोई संत नहीं बन जाता। आज समाज में ऐसे कितने ही प्रतिष्ठित तथाकथित धर्मगुरु हैं, जो लोगों को बड़े-बड़े अध्यात्मिक उपदेश तो देते हैं लेकिन न तो उन्होंने स्वयं ईश्वर दर्शन किया है और न ही अपनी शरण में आए जिज्ञासुओं को ईश्वर-दर्शन करवाने का सामर्थ्य रखते हैं। उलटा लोगों को अपने शब्दजाल में फँसा कर और भी भ्रमित कर देते हैं। ऐसे में, आज ज़रूरत है पूर्ण गुरु की पहचान को प्राप्त करने की। पूर्ण गुरु वहीं होते हैं जो दीक्षा देते समय मस्तक पर हाथ रख तत्क्षण ही ईश्वर का दर्शन घट में करवा देते हैं। वो कोई मन्त्र, माला, नाम आदि नहीं देते अपितु ईश्वर के प्रकाश रूप को भीतर ही दिखा देते हैं। अत: हम भी खोज करें ऐसे सद्गुरु की; अगर कहीं न मिलें तो दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान में गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी ईश्वर का दर्शन करवाने का सामर्थ्य रखते हैं। संस्थान प्रभु-दर्शन के सच्चे अभिलाषियों का हार्दिक स्वागत करता है।
इस अवसर पर कथा पंडाल में होली का उत्सव भी बहुत धूमधाम से मनाया गया। संस्थान के प्रतिनिधित्व में स्वामी आदित्यानंद जी (अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, मुख्यालय, दिल्ली), साध्वी श्वेता भारती जी एवं साध्वी हेमा भारती जी आदि उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में शहर के अनेकानेक सम्मानित अतिथि जैसे – श्रीमान विजय पाल आढ़ती जी (विधायक, हापुड़), श्रीमती कविता माधरे जी (जिला अध्यक्ष, हापुड़), श्रीमान दीपक अग्रवाल जी एवं श्रीमती नीरू अग्रवाल जी, श्रीमान सुधांशु महेश्वरी जी एवं श्रीमती प्रीति महेश्वरी जी, श्रीमान अरुण अग्रवाल जी एवं श्रीमती रचना अग्रवाल जी, श्रीमान अनिल गोयल जी, श्रीमान संजीव जैन जी, श्रीमान शरद अग्रवाल जी, श्रीमान ललीत कंसल जी, श्रीमान संजय बंसल जी, श्रीमान सन्नी जैन जी एवं श्रीमती श्वेता जैन जी, आदि उपस्थित रहे। कथा को विराम प्रभु की पावन आरती एवं प्रसाद वितरण से दिया गया। आगामी दिवस सुंदरकांड में निहित आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर किया जाएगा। अतः सभी भक्त श्रद्धालुगण समय से पहुंचकर कथा का लाभ प्राप्त करें।
 



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