चार हजार रुपए की रिश्वत देने के बावजूद किसान से ओर रिश्वत मांगने के आरोपी लेखपाल को डीएम ने किया निलंबित

हापुड़।
हापुड़ के एक गांव निवासी किसान से भूमि पर वरासत दर्ज करने के नाम पर चकबंदी लेखपाल ने चार हजार रुपए की रिश्वत लेने के बावजूद भी तीन हजार रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है।
जानकारी अनुसार हापुड़ के गांव पीरनगर निवासी किसान मदनपाल ने बताया कि ग्राम तिगरी स्थित खतौनी खाता संख्या-114 के गाटा संख्या-275, 283 व 302 के खातेदार रजुवा उर्फ राजाराम पुत्र अनूप सिंह की
मृत्यु हो चुकी है। इनके स्थान पर वरासत दर्ज कराने के लिए वह पिछले एक वर्ष से चक्कर काट रहे हैं। इसके बाद भी कोई वरासत दर्ज नहीं की गई। किसान ने अंकित खातों पर विरासत के आधार पर स्वयं अपने भाई सुभाष व राजकुमार और माता बीरबती का नाम बतौर वारिस दर्ज कराने की मांग की। मामले में सुविधा शुल्क मांगने पर डीएम ने चकबंदी विभाग के अधिकारी को जांच के आदेश दिए।
इस मामले में मदनपाल ने जांच के दौरान बयान दर्ज कराकर बताया कि चकबंदी लेखपाल विपिन धामा द्वारा सात हजार रुपये की मांग की गई, जबकि उनकी पारिवारिक स्थिति बेहद खराब है और उनकी पत्नी की मृत्यु कैंसर से हो
चुकी है। यहां तक कि पुत्र भी कैंसर से पीड़ित है। आरोप है कि उनके द्वारा चार हजार रुपये भी चकबंदी लेखपाल विपिन धामा को दिए गए लेकिन इसके बाद भी वरासत दर्ज नहीं की गई। इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी उनके पास है। हालांकि, किसान ने रिकार्डिंग नहीं दी।
अधिकारियों ने गांव तिगरी जाकर रजुवा उर्फ राजाराम के स्थान पर बतौर वारिस सुभाष, राजकुमार, मदनपाल व बीरमती का नाम अभिलेखों में दर्ज कर
दिया है। जांच में सामने आया कि चकबंदी लेखपाल 22 दिसंबर 2025 से गांव तिगरी पर कार्यरत है। तभी से हो अविवादित विरासत संबंधी प्रकरण अपने पास लंबित रखने के दोषी मिलने पर निलंबन किया गया है।
बिना बजह वरासत के मामले को लटकाकर रखने के मामले में कार्रवाई हुई है। हालांकि, इस प्रकार के अन्य मामले भी तहसील और चकबंदी विभाग के स्तर पर लंबित है। जिस कारण पीड़ितों को परेशानी होती है।












