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पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह शिशौदिया की 6 वीं पुण्यतिथि मनाई

#साठा चौरासी के शेर महान राजपूत व्यक्तित्व # स्व. नरेन्द्र सिंह शिशोदिया जी #के जीवन का कुछ महत्वपूर्ण परिचय

आज साठा चौरासी की एक महान हस्ती से आपका परिचय कराएंगे जो आधुनिक युग में राजपूतो के लिये प्रेरणास्त्रोत हैँ।
इन हस्ती का नाम है ठाकुर नरेन्द्र सिंह शिशोदिया जिन्हें साठा का शेर भी कहा जाता है। साठा पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गहलोत/शिशोदिया राजपूत बाहुल्य इलाका है जहाँ इनके 60 गाँव हैँ। ठाकुर नरेन्द्र सिंह शिशोदिया जी को मशहूर शिक्षाविद् , समाज सुधारक और अपने समय के बहुत ईमानदार एवं जबरदस्त विकास कराने वाले नेता के रूप में याद किया जाता है। ग्रामीण और सामाजिक विकास में रूचि रखने के कारण उन्होंने साठा चौरासी क्षेत्र के साथ राजपूत बाहुल्य क्षेत्र के गाँव फगोता, समाना, आलमनगर, खेड़ा, परतापुर, फरीदनगर जैसे अनेक गावों मे संघ की शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना कराई. इनके आलावा उनके द्वारा हजारो युवाओ को रोजगार दिलाने का कार्य किया। विधायक रहते हुए मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र का अद्वितीय विकास कराया जिसके लिये इस क्षेत्र के सबसे बड़े व्यक्तित्व के रूप में आज भी वो याद किये जाते हैँ और उन्हें साठा शिरोमणी कहा जाता है।
ठाकुर साब का जन्म 4 जून 1949 को जिला गाज़ियाबाद में साठा क्षेत्र के डाहाना गाँव में पिता ठाकुर रघुवंश नारायण सिंह व माता राजवती देवी के यहाँ हुआ। आपके पिता सरकारी विभाग मे BDO के पद पर मुरादाबाद मण्डल मे अपनी सेवाएं दी!उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा मुरादाबाद मण्डल करते हुए SSB कॉलेज हापुड़ से स्नातक व राजनीतिशास्त्र से MA और अलीगढ़ कॉलेज से कानूनी शिक्षा LLB की डिग्री प्राप्त की। उनमें बचपन से ही अपने देश भारत व अपने हिन्दू धर्म की भावना कूट कूट कर भरी हुई थी।
सन 1980 मे अपने साठा के डाहाना, छज्जुपुर, मतनवली, नरैना, चाचोई, सिरोधन, दहीरपुर, रजाकपुर, भुड़िया गाँव की शिक्षण संस्था जनता इंटर कॉलेज छज्जुपुर डाहाना मे नागरिकशास्त्र के प्रवक्ता के रूप मे अपना शिक्षण कार्य शुरू किया.

—राजनैतिक और सामजिक जीवन—
आप 1985 मे संघ के सम्पर्क मे आये और आपको बजरंग दल जिला संयोजक बनाया. 1990 आपको बजरंग दल का विभाग संयोजक बनाया गया और पहली बार 1990 मे पहली बार राम जन्मभूमि आंदोलन मे बुलंदशहर जेल गए.
1992 मे आप राम मंदिर आंदोलन मे आप रामपुर मनिहारन मे 45 दिन जेल मे रहे.
भारतीय जनता पार्टी 1992 मे पहली बार राजनितिक जिम्मेदारी जिला महामंत्री के रूप मे मे मिली
ठाकुर नरेंद्र सिंह शिशोदिया जी राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय रहते हुए वो तीन बार विधायक रहे जिस दौरान उन्होंने साठा चौरासी क्षेत्र में विकास की गंगा बहा दी। 1993 से लेकर 2007 तक लगातार मोदीनगर विधानसभा सदस्य रहे और शिक्षा के क्षेत्र मे कई कीर्तिमान स्थापित किये जिस दौरान उन्होंने क्षेत्र में अनेको नए प्राइमरी स्कूल, माध्यमिक स्कूल के भवन तथा पुल बनवाए।
पहली बार 1993 में आप भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में विधायकी का चुनाव लड़े और जनता दल के प्रत्याशी सुखवीर सिंह गहलोत को 7 हजार के भारी अंतर से हराकर जीते और क्षेत्र मे भय, आतंक,फिरौती और हफ्ता वसूली से अपने क्षेत्र को निजात दिलाई। इस काल में उन्होंने अनेक स्थानों पर पहली बार बिजली और पक्की काली सड़क बनवाई। इसके अलावा आपने मसूरी-धौलाना-सपनावत मार्ग का निर्माण और धौलाना से पिलखुवा तक सड़क का चौड़ीकरण व तीव्र मोड़ो से निजात दिलवाई

दूसरी बार 1996 में आप विधायक बने और दूसरी बार भी बसपा से चुनाव लड़े सुखवीर सिंह गहलोत को हराया। इस काल में उन्होंने क्षेत्र का अद्वितीय विकास करवाया। अनेको प्रमुख सड़को का निर्माण कराया!
:- तीसरी बार आप भारतीय जनता पार्टी के प्रत्यासी के रूप मे चुनाव लड़े और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी धर्मेश तौमर को लगभग 7 हजार वोटो से हराया और ग़ाज़ियाबाद जिले के इकलौते भाजपा के टिकट पर जीतकर विधायक बने

—व्यक्तित्व—
निजी जीवन में भी शिशोदिया जी बहुत अनुशाषित और संयमित जिंदगी जीने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने जीवन में कभी मांस, मदिरा, पान, तंबाकू, गुटखा आदी किसी तरह का सेवन नही किया। देशी वेश भूषा और खान पान के प्रबल समर्थक थे। खान पान में दही और मठ्ठे और सादे कच्चे खाने का ही प्रयोग करते थे। वो आयुर्वेद प्रेमी और एलोपैथी से घृणा करने वाले थे। बेबाक हाजिर जबाबी निर्भीक वक्ता, अनुशासनप्रिय, अध्यात्मवादी और चापलूसी से हमेशा घृणा करते थे।
हिंदी अंग्रेजी और संस्कृत तीनो के ज्ञाता होने के साथ ही गीता, रामायण, महाभारत, भागवत, सत्यार्थ प्रकाश, जैसे ग्रंथो के ज्ञाता या अध्ययनशील थे। गौ,गंगा, गायत्री मे आपकी असीम आस्था थी ! गीता के अंतिम श्लोक को मनुष्य, समाज तथा देश के उत्थान के लिये मूलमंत्र मानते थे!



राजनगर स्थित अपने आवास rdc मे आपने जीवन के अंत में 15 फरवरी 2020 को चलते फिरते अमर विधायक नरेन्द्र सिंह शिशोदिया जी का स्वर्गवास हो गया और आपका अंतिम संस्कार आपके पैतृक गाँव छज्जुपुर डाहाना मे हिन्दू रीतिरिवाज के साथ सम्पन किया गया क्यूंकि उनको अपने गाँव अपने खेत और अपनी आलू की खेती से बहुत प्यार था



विधायक जी के अनुसार दृढ़ निश्चय, अडिग विश्वास, सतत प्रयास और मृदु व्यव्हार ही जीवन संघर्ष के अचूक हथियार हैँ और ये ही उनकी सफलता की कुंजी है।
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श्रद्धेय नरेन्द्र सिंह शिशोदिया जी ने जीवन भर प्रयत्नशील रहते हुए मोदीनगर क्षेत्र का सर्वांगीण विकास करवाया। ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैँ जब एक व्यक्ति ने अपने जीवन का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ अपने क्षेत्र की चिंता करना और अपनों के लिए किसी से भी कही भी लड़ जाने की उनकी बेधडक छवि उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण थी
एक बार फिर से महान देशप्रेमी और समाज प्रेमी, महाराणा प्रताप के परम अनुयायी, साठा स्वाभिमानी, पूर्व विधायक स्व.नरेन्द्र सिंह शिशौदिया जी के श्री चरणों मे शत शत नमन 🙏🙏🙏













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