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80 प्रतिशत टीबी रोग फेफड़ो से संबंधित होता है-जिला क्षय रोग अधिकारी

हापुड़(अमित अग्रवाल मुन्ना)।
विश्व टीबी दिवस है। हर वर्ष 24 मार्च हो टीबी दिवस का आयोजन इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए किया जाता है। मंगलवार को जिला क्षय रोग अधिकारी डा. राजेश सिंह ने कुचेसर रोड चौपला स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड मैनेजमेंट में टीबी कार्यक्रम के प्रति छात्रों के संवेदीकरण के लिए आयोजित कार्यक्रम में कहीं। पीपीएम कोर्डिनेटर सुशील चौधरी ने बताया बुधवार को टीबी दिवस के मौके पर हापुड़ में कोठीगेट से नगरपालिका होते हुए वापस कोठीगेट तक जागरूकता रैली निकाली जाएगी। इस जागरूकता रैली को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. रेखा शर्मा हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगी। रैली के आयोजन के बाद जिला अस्पताल स्थित क्षय रोग विभाग में एक गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया बुधवार को क्षय रोग विभाग में आयोजित गोष्ठी में नवभारत कल्याण समिति नामक एनजीओ के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। यह एनजीओ जनपद में 2012 से एचआईवी पर काम कर रहा है। दरअसल टीबी और एचआईवी पर एक साथ काम करने की जरूरत है। इसीलिए हर टीबी रोगी की एचआईवी जांच किया जाना शासन से जरूरी किया गया है। दरअसल टीबी रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो जाती है। इन रोगियों में एचआईवी और मधुमेह होने का खतरा काफी बढ जाता है। उन्होंने बताया कि विश्व टीबी दिवस के मौके मार्च माह के दौरान एक दर्जन से अधिक संस्थानों में संवेदीकरण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया 80 प्रतिशत टीबी रोग फेफड़ो से संबंधित होता है, जबकि 20 प्रतिशत में स्किन टीबी, ब्रेन टीबी और अन्य अंगों की टीबी के मामले होते हैं। आमतौर पर टीबी रोग के लक्षणों में हल्का बुखार रहना, अचानक वजन कम होना और 15 दिन से ज्यादा खांसी रहना होते हैं। यदि इस प्रकार के लक्षण हों तो टीबी की जांच अवश्य कराएं। टीबी की जांच और उपचार स्वास्थ्य विभाग निशुल्क उपलब्ध कराता है। टीबी का एक बहुत बड़ा कारण कुपोषण भी है। बेहतर पोषण के लिए शासन टीबी के रोगियों को हर माह पांच सौ रूपए उपलब्ध कराता है।
उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र में टीबी का उपचार करने वाले चिकित्सकों को भी नोटिफिकेशन पर शासन की ओर से पांच सौ रूपए की राशि दी जाती है। यदि प्राइवेट चिकित्सक को ऐसा कोई मरीज मिलता है जो दवाईयों पर पैसा खर्च करने की स्थिति में नहीं है तो उसे सरकार अस्पताल भेजें ताकि वह निशुल्क उपचार पा सके। लगातार उपचार के बाद टीबी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। टीबी की दवा बीच में न छोड़ें। क्योंकि दुबारा दवा शुरू करने पर उपचार और लंबा व मुश्किल हो जाता है। कचेसर में आयोजित संवेदीकरण कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट के चेयरमैन कुलदीप शर्मा, बीएड के विभागाध्यक्ष और प्रभारी प्राचार्य अमरदेव शर्मा, शिक्षक बृजपाल सिंह, ओम सिंह, अरूण सिंह और पूजा चौधरी का विशेष सहयोग रहा।



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