शीतला अष्टमी 11 मार्च को दो शुभ योग हैं , ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः 108 बार जाप करना मंगलकारी है – ज्योतिर्विद पं सुबोध पाण्डेय

हापुड़।
शीतला अष्टमी (बसौड़ा पूजन )चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि ११ मार्च २०२६ दिन बुधवार को दो शुभ योग हैं इसी दिन चित्र कला अष्टमी भी हैंअति शुभ रहेगा और शास्त्र सम्मत हैं ।
बसौड़ा पूजन में शीतला माता की पूजन किया जाता हैं ।मुख्य मंत्र जो जाप करने चाहिए ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः १०८ बार जाप करना मंगलकारी हैं तथा रोग निवारण और स्वास्थ्य रक्षा के लिए प्रभावशाली हैं /यह पूजन विशेष कर बच्चों केस्वास्थय और चेचक जैसी बीमारियों से रक्षा के लिए किया जाता हैं /
अष्टमी तिथि १० मार्च २०२६ को रात्रि ०१ बजकर ५४ मिनट से प्रारम्भ होकर अगले दिन ११ मार्च २०२६ को रात्रि ०४ बजकर १९ मिनट तक हैं /
इस व्रत में उदया तिथि देखा जाता हैं /पूजन का शुभ मुहूर्त ११ मार्च २०२६ दिन बुधवार की सुबह ०६ बजकर ३० मिनट से शाम ०६ बजकर ३० मिनट तक कल्याणकारी हैं /
एक दिन पूर्व यानिकि १० मार्च २०२६ को पूड़ी,पुआ ,कढ़ी ,खीर ,दही ,मीठे चावल ,तथा मेवा तैयार कर लें क्योंकी बासी भोजन का ही माता को भोग लगाना हैं /
११ मार्च २०२६ को व्रत के दिन प्रातःकाल ठन्डे पानी से स्न्नान करें/गर्म पदार्थ न खाए और परिवार को भी ठंडा भोजन ही दे /
चूल्हे की पूजन करें परन्तु जलाएं नहीं शास्त्रों में ऐसा उल्लेख किया गया हैं /
स्न्नान के बाद संकल्प करें माम् गृहे शीतलारोगजनितोपद्रव प्रशमन पूर्वकायुरारोग्यैश्वर्याभिवृद्धये शीतलाष्टमी व्रतं करिष्ये /
फिर शीतला माता को गंध ,पुष्प ,रोली ,से पूजा करें /बसी भोजन का भोग लगाए /पूजन के बाद दान अवश्य करें/
शीतला माता के व्रत रखने से परिवार को रोगों से रक्षा मिलती हैं और स्वास्थय लाभ होता हैं /दाहज्वर ,पीतज्वर ,बुखार और नेत्र रोग रोगों से शीतला माता रक्षा करती हैं /
शीतला माता की की पौराणिक कथा एक नगर में लोग माता शीतला की पूजा नहीं करते थे /वे स्वच्छता और और धार्मिक नियमों की भी उपेक्षा करते थे /
एक दिन नगर में भयकर महामारी फैल गई !लोग एक -एक करके रोग के चपेट में आने लगे !तब एक वृद्ध महिला ने लोगों को माता शीतला की पूजा करने और घर परिवार में स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी !जब लोगों ने माता की आराधना की और नियमों का पालन किया ,तब धीरे -धीरे महामारी समाप्त हो गई
ज्योतिष दृष्टिकोण से इस दिन चन्द्रमा के प्रभाव वाले नक्षत्र का योग होने से यह पर्व रोग निवारक और मानसिक शांति के लिए विशेष फलदायी माना जाता हैं !
//श्री ज्योतिष कार्यालय //
ज्योतिर्विद पं सुबोध पाण्डेय
देवलोक कॉलोनी हापुड़
संपर्क सूत्र 9634408321












