बोगस फर्म बनाकर उघमी ने की 2.56 करोड़ की टैक्स चोरी, रजिस्ट्रेशन कैंसिल

हापुड़।
एसआईबी ने धौलाना क्षेत्र में 2.56 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले का खुलासा किया है। फर्म ने कागजों में ही कारोबार दिखाकर अन्य दो फमों से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) लेकर पासऑन कर दिया था, जबकि हकीकत में कोई वास्तविक व्यापार नहीं हो रहा था। जांच में खुलासा होने पर फर्म का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है।
जीएसटी विभाग में 10 दिसंबर 2024 को धौलाना में महिला वस्त्र, सूत और तांबे की प्लेट्स व शीट्स की खरीद और बिक्री के लिए सिंह ट्रेडर्स के नाम से पंजीकरण कराया गया था। फर्म ने वर्ष 2024-25 में लगभग 10.44 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्शाया। इसमें करीब 1.37 करोड़ रुपये का कर देय पाया गया।
इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से समायोजित किया गया। इसी तरह वर्ष 2025-26 में अब तक फर्म का टर्नओवर 7.24 करोड़ रुपये बताया गया है। इसमें 1.19 करोड़ रुपये का कर समायोजन भी आईटीसी से ही किया गया है। दोनों वर्ष में फर्म ने कैश से टैक्स जमा नहीं किया।
विभाग के अधिकारियों के डेटा विश्लेषण के दौरान सामने आया कि फर्म की अधिकांश आईटीसी सिर्फ दो अन्य फर्म किरन इंटरप्राइजेज और एडीटी ट्रेडस से ली जा रही थी।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि दोनों फर्म आपस में एक-दूसरे को आईटीसी पासऑन कर रही थीं और उसके बाद वही आईटीसी सिंह ट्रेडर्स को ट्रांसफर कर दी जाती थी। इन तीनों फर्मों ने वास्तविक कर का भुगतान नहीं किया, बल्कि केवल कागजों पर खरीद-बिक्री दिखाकर अनुचित आईटीसी तैयार किया। जांच में 2.56 करोड़ का फर्जी जीएसटी का घोटाला मिला।
एसआईबी के सीटीओ सतीश तिवारी व आलोक रॉय जांच करने के लिए 19 सितंबर 2025 को व्यापार स्थल धौलाना पहुंचे। सिंह ट्रेडर्स के घोषित पते पर कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं हो रही थी और न ही वहां कोई स्टॉक उपलब्ध था। प्रथम दृष्टया स्पष्ट हो गया कि फर्म फर्जी है। इसे केवल कर चोरी और आईटीसी घोटाले के लिए तैयार किया गया।
जांच के दौरान वहां मनीष नामक व्यक्ति उपस्थित मिले। उन्होंने बताया कि उनका किसी फर्म या व्यापार से कोई संबंध नहीं है। 10 अगस्त 2024 को उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य कागजात कहीं खो गए थे। इसकी शिकायत स्थानीय थाने में दर्ज कराई गई थी।
एसआईबी के संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह का कहना है कि टीम ने सभी दस्तावेजों और अभिलेखों का सत्यापन कर लिया है, फर्म का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। जिस व्यक्ति के नाम से फर्म पंजीकृत हैं उसे दस्तावेज गुम होने के की शिकायत प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं












