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एक साल रहेगा सेहत और जीवन को खतरा, अक्तूबर तक तीसरी लहर

कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा।

सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।

दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर 
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

38 में से 25 विशेषज्ञों का कहना है वायरस के मौजूदा वैरिएंट टीके के प्रभाव कम नहीं कर पाएंगे
30 विशेषज्ञों का कहना है कोरोना भारत के लिए अगले साल तक बना रहेगा खतरा

टीका : भारत में टीके के लिए पात्र 95 करोड़ लोगों में से केवल 5 फीसदी को टीका लगा है। बहुत बड़ी जनसंख्या अभी भी खतरे के बीच है। हर्ड इम्युनिटी भी अभी दूर की कौड़ी है।

दावा : तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि बच्चों को वायरस से खतरा है लेकिन बच्चों पर गंभीर प्रभाव नहीं दिखेगा।

डर : तीसरी लहर में बच्चे बड़ी संख्या में संक्रमित हुए तो यह सबसे बड़ी आपदा होगी क्योंकि बच्चों के लिए पीडियाट्रिक इंसेंटिव केयर बहुत कम हैं। सरकार की कोशिशें भी कम पड़ सकती हैं।

टीका नहीं लगा तो बच्चों पर खतरा
सर्वे में शामिल 40 विशेषज्ञों में से दो तिहाई यानी 40 में से 26 ने कहा कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अधिक खतरा है। बंगलूरू के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड साइंस के डॉक्टर प्रदीप बनानदुर का कहना है कि इसका प्रमुख कारण बच्चों को कोरोना का टीक नहीं लगना है क्योंकि बच्चों के लिए देश में अभी टीका उपलब्ध ही नहीं है। वहीं, 14 विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को खतरा नहीं है।

ज्यादा कोशिशें, ज्यादा एहतियात जरूरी
कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर देवी प्रसाद शेट्टी का कहना है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर में बच्चे बड़ी संख्या में संक्रमित हुए और हमने पहले से तैयारी नहीं की है, तो आखरी समय कुछ नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा, यह पूरी तरह से अलग समस्या है।

देश में पीडियाट्रिक आईसीयू बहुत कम है। संक्रमण का स्तर बढ़ता है तो यह बड़ी आपदा होगा विशेषज्ञ मानते हैं तीसरी लहर से बचाव के लिए ज्यादा कोशिशें और ज्यादा एहतियात बेहद जरूरी है।

2 साल में विकसित होगी हर्ड इम्युनिटी
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन वायरोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर रॉबर्ट गालो का कहना है कि कोरोना पर काबू के लिए टीका ही एकमात्र तरीका है। उन्होंने कहा कि भारत में अगले 2 वर्ष तक टीकाकरण और संक्रमण के कारण हर्ड  विकसित हो जाएगी। जिससे हालात सामान्य होने लगेंगे। फिलहाल लोगों को हर हाल में सभी सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा यही विकल्प है।

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