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एसएसवी कालेज की प्रबंध समिति के सचिव पर फ्राड का मुकदमा दर्ज

  • फायर की एनओसी के लिए फर्जी कागजात लगाने का आरोप
  • झूठे शपथपत्र लगा बीबीए और बीसीए की मान्यता लेने के भी आरोप
    हापुड़।
    शहर के सबसे प्रतिष्ठित एसएसवी डिग्री कॉलेज की प्रबंध समिति के सचिव पर धोखाधड़ी के आरोप में सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ है। यह मुकदमा सराफा बाजार के रहने वाले एक व्यक्ति ने दर्ज कराया है। जिसमें आरोप लगाया गया है कि फायर की एनओसी के संबंध में फर्जी कागजात और झूठा शपथपत्र बनाकर बीबीए और बीसीए की मान्यता प्राप्त की गई है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
    पुलिस के मुताबिक सर्राफा बाजार निवासी वीरेंद्र कुमार उर्फ पिल्लू ने सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया कि एसएसवी डिग्री कालेज चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से सम्बद्ध है। इसको निरीक्षण मंडल की संस्तुति के आधार पर विश्वविद्यालय ने 13-06-2023 को बीबीए और बीसीए पाठ्यक्रमों में अस्थायी सम्बद्धता
    प्रदान कर दी गई। इस अस्थाई मान्यता को प्राप्त करने के लिए एसएसवी डिग्री कालेज के प्रबन्ध समिति के सचिव अमित अग्रवाल जोनी छावनी वाले द्वारा जो स्वप्रमाणित अग्निशमन का प्रमाण पत्र निरीक्षक मंडल को प्रस्तुत किया था, वह पूरी तरह से फर्जी है। क्योंकि अग्निशमन अधिकारी से सूचना के अधिकार के तहत इस संबंध में जानकारी मांगी गई थी। जिसमें जवाब मिला कि उन्होंने किसी प्रकार की अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है।‌

शिकायतकर्ता का आरोप है कि एसएसवी डिग्री कॉलेज की प्रबंध समिति के सचिव अमित अग्रवाल जोनी छावनी वाले ने विश्वविद्यालय और प्रदेश सरकार को गुमराह करने के उद्देश्य से झूठा शपथ पत्र दिखाकर मान्यता प्राप्त कराई। इसलिए बीबीए और बीसीए की मान्यता को रद्द करने और फर्जी प्रमाण पत्रों के माध्यम से अस्थाई मान्यता लेने वाले प्रबंध समिति के सचिव के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

क्या कहते हैं सचिव

एसएसवी डिग्री कालेज के सचिव अमित अग्रवाल जोनी छावनी वालों का कहना है कि पूर्व समिति द्वारा बीकॉम / बीएससी सेल्फ फाइनेंस के वर्ष 2021 के स्थाई पैनल में उक्त फायर एनओसी लगाई गई थी। जिसे वर्तमान कार्यवाहक कार्यालय अधीक्षक ने बीबीए, बीएससी पैनल में भी लगाई। जिसकी पुष्टि उन्होंने प्रबंध समिति की मीटिंग में भी की थी। विश्वविद्यालय द्वारा कालबाधित बताए जाने के उपरान्त वर्तमान प्रबंध समिति द्वारा पूरे महाविद्यालय की फायर एनओसी ले ली गई। फायर एनओसी का मामला पूर्व प्रबंध समिति से जुड़ा हुआ है।

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